
जेल तक पहुंचा कोरोना का असर, कोरबा व कटघोरा जेल से 38 बंदी किए गए रिहा, 30 दिन बाद करना होगा समर्पण
कोरबा. कोरबा और कटघोरा की जेल से 38 बंदियों को 30 अप्रैल तक के लिए रिहा किया गया है। लॉकडाउन में बंदियों को घर पहुंचने में परेशानी ना हो, इसके लिए जिला प्रशासन को अपनी गाड़ी से घर तक छोड़ने के लिए कहा गया है। कोरोना का संक्रमण जेल तक नहीं पहुंच सके और जेल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो, इसके लिए न्यायपालिक भी पहल कर रही है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक पहल की थी। इसके तहत जेल से कुछ बंदियों और पैरोल पर कुछ कैदियों को रिहा करने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में बिलासपुर हाइकोर्ट ने भी एक आदेश जारी किया था। इस पर कोरबा के अपर एवं सत्र न्यायालय ने एक आदेश जारी किया है। ऐसे बंदी जिन पर गंभीर आरोप नहीं है, उन्हें जेल से रिहा किया जा रहा है।
कोरबा और कटघोरा की जेल से 38 बंदियों को रिहा करने के लिए शनिवार को एक आदेश जारी किया गया। इसके बाद कोरबा व कटघोरा की जेल से 38 बंदियों को रिहा किया गया। इसकी जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दी गई है।
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बताया गया कि उन्हीं मामलों में बंदियों को रिहा किया जा रहा है, जिसमें अधिकतम सात साल की सजा का प्रवधान है। बंदियों को मुचलका पर रिहा किया जा रहा है। उनको घर तक आने-जाने में परेशानी ना हो, इसके लिए प्रशासन को गाड़ी की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। हालांकि रिहा किए गए बंदियों को 30 दिन के बाद जेल में समर्पण करनी होगी। रिहाई में विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राकेश बिहारी घोरे और प्राधिकरण की सचिव सीमा जगदल्ला की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्हें उच्च न्यायालय के आदेश पर रिहाई के लिए पहल की है।
गंभीर मामले में आरोपियों को राहत नहीं
हत्या, दुष्कर्म या छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामले के आरोपियों को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उन्हें रिहा नहीं किया जाएगा।
बाल संप्रेक्षण गृह से मांगी रिपोर्ट
अलग-अलग मामले में बाल संप्रेक्षण गृह में बंद नाबालिगों की संख्या के बारे में भी विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जानकारी मांगी गई है।
Published on:
06 Apr 2020 02:08 pm
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