
अब उसकी जगह पर जंगली घास तक उग चुकी
कोरबा. नगर निगम ने सवा साल पहले बीडी महंत गार्डन का निर्माण करवाया था। गार्डन को खास स्वरूप देने के लिए नागपुर की स्पेशल चटाई घास लगवाई गई।
काम पूरा होने के बाद गार्डन की सुरक्षा को लेकर अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। चटाई घास को मवेशी चर गए। पूरे गार्डन में कहीं भी चटाई घास का नामोनिशान तक नहीं है। अब उसकी जगह पर जंगली घास तक उग चुकी है।
नगर निगम के स्टेडियम के भीतर लगाई गई 83 लाख की घास के मामले में अब तक कार्रवाई भी नहीं हो सकी थी। इधर एक गार्डन में लगाए गए स्पेशल घास के गाय चरने का मामला सामने आया है। मिनीमाता कॉलेज के समीप खाली पड़ी जगह पर नगर निगम द्वारा गार्डन का निर्माण करवाया गया।
आसपास रिहायशी इलाका होने की वजह से निगम ने गार्डन में महंगे झूलों के साथ घास भी कुछ खास तरह का लगवाया गया। इसके लिए लगभग 5 लाख रूपए खर्च कर नागपुर से स्पेशल चटाई घास मंगवाई गई। घास की खासियत यह थी कि घास को सीधे साफ-सुथरी जगह पर बिछाकर पानी डाल देने से वह उसी जगह पर जम जाती थी। इसके घास दिखने में भी सुंदर दिखते थे। लेकिन निगम द्वारा इस गार्डन का काम पूरा करने के बाद ध्यान नहीं दिया गया। मुख्यद्वार खुला होने की वजह से लगातार मवेशियों का गार्डन में आवाजाही लगी रही। और घास को नुकसान पहुंचाया गया। अब इसकी जगह जंगली घास उग चुके हैं।
इस गार्डन का मेंटनेंस तक नहीं
शहर के हर गार्डन का मेंटनेेंस करवाया जा रहा है। लेकिन इस गार्डन का मेंटनेंस का ठेका नहीं दिया गया है। यही वजह है साल भर पहले तैयार हुए गार्डन की स्थिति बदहाल हो चुकी है। लाइट के लिए लंबे खंभे में भी जर्जर हालत में है। झूले 90 फीसदी टूट चुके हैं। लेकिन मरम्मत या फिर नए झूले लगाने को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बड़ा सवाल जब मेंटनेंस नहीं तो लाखों खर्च करने का औचित्य क्या ?
सबसे बड़ा सवाल यह कि नगर निगम द्वारा जब सही तरीके से देखरेख नहीं कर सकता है तो फिर लाखों रूपए खर्च करने का औचित्य ही क्या है। रिकार्ड में यह बताया जा रहा है कि वार्डों में लाखों रूपए खर्च किया गया। लेकिन उसकी स्थिति आज कैसी है उपयोगिता हो रही है कि नहीं इसे अधिकारी झांकने तक नहीं जाते।
देखरेख की शर्त भी नहीं रखी गई ठेेकेदार को
हर गार्डन के निर्माण के साथ छह महीने या फिर सालभर देखरेख की शर्त रखी जाती है लेकिन इस गार्डन के निर्माण में इस शर्त को शामिल नहीं किया गया था। ठेेकेदार ने काम पूरा करने के बाद गार्डन निगम को हैंडओवर कर दिया। उसके बाद से किसी ने गार्डन की स्थिति नहीं देखी।
Updated on:
9 Aug 2018, 10:34 AM IST
Published on:
8 Aug 2018, 9:38 PM IST
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