
बरमुड़ा घास को गाय चर गयी, अफसरों को भनक तक नहीं लगी
कोरबा. आपने बिहार के चारा घोटाले के बार में सुना होगा। हम आपको कोरबा में हुए घास घोटाले के बारे में बताने जा रहे हैं। 82.83 लाख रूपए की घास स्टेडियम में लगाई गई थी। घास लगने के बाद स्टेडियम की तस्वीर बदल गई थी। लेकिन बाद में अफसरों ने देखरेख नहीं कराई और अब इसे गाय ने चर दिया। इस बात का खुलासा सबसे पत्रिका ने ही किया था। जिसके बाद अफसरों में हड़कंप मच गया है। चारों तरफ जंगली घास उग चुके हैं। हालांकि मामले का खुलासा होने के बाद निगम ने कर्मचारियों से जंगली घास को कटिंग कराई है, लेकिन बरमुड़ा घास का अब भी नामोनिशान तक नहीं है।
स्टेडियम की घास को गाय चरने के मामले से इतना तो स्पष्ट हो गया कि अफसर लाखों रूपए के काम करवाने के बाद उसे देखने तक नहीं जाते हैं। ठेकेदार से एक साल का मेंटनेेंस कराने के बाद निगम ने उसे हैंडओवर तक ले लिया। लेकिन इतने बड़े स्टेडियम की जवाबदारी दी भी गई तो एक चौकीदार को।
चौकीदार जिसकी प्रतिमाह की तन्खवाह महज 55 सौ रूपए है। उसे पूरे स्टेडियम का जिम्मा दे दिया गया। उसे यह तक नहीं बताया गया कि स्टेडियम में 83 लाख रूपए की बरमुड़ा घास लगी है। उसकी देखरेख कैसे करनी है। चौकीदार ने कभी पानी का छिड़काव किया। दरअसल इसके लिए उसे किसी तरह की पाइप या फिर दूसरे संसाधन दिए गए। बीच में कुछ काम से स्टेडियम के गेट खोल दिए गए। मवेशी अंदर घुस गए और विशाखापटनम से मंगाई गई घास को चर गए।
जब लगी थी बरमूड़ा घास तब कुछ ऐसा था स्टेडियम का नजारा
बरमूड़ा घास को जब पहली बार स्टेडियम में लगाया गया था। तब नजारा बेहद आकर्षक था। यह कार्य अपै्रल 2017 में पूरा कर लिया गया था। आमतौर पर फुटबॉल ग्राउंड में पांच प्रकार के घास का प्रयोग किया जाता है। गर्म जगहों के लिए बरमूडा घास ज्यादा उपयोगी होता ह। ठंड प्रदेश में केंटुकी कूलग्रास प्रयोग में लाया जाता है। बरमूडा घास को एथलेटिक्स फील्ड के लिए सबसे बेहतर घास माना जाता है। आमतौर पर गर्म प्रदेश में पाया जाने वाला यह घास आधुनिक फुटबॉल ग्राउंड में उपयोग में लाया जाता ह। मैच के 24 घंटे बाद ही यह फिर से खेलने लायक हो जाता है। इसी सोच के साथ निगम द्वारा इस घास को लगाया गया था।
82.83 लाख रूपए की घास गाय चर गई, सोते रहे निगम के अफसर
स्टेडियम में पिछले साल लगाई गई 82.83 लाख रूपए की घास गाय चर गई। यह काम पूर्व कांग्रेस के शहर अध्यक्ष के पुत्र का था। ठेेकेदार को घास लगाने के साथ साल भर मेंटनेंस भी करना था। 24 घंटे देखरेख के लिए गार्ड रखने थे। जिसे नहीं रखा गया। मुख्य दरवाजे खुले छोड़ दिए गए। नतीजा यह रहा कि साल भर में नए घास का नामोनिशान मिट चुका है। कटीलें घास व पौधे तक उग चुके हैं।
नगर निगम द्वारा पिछले तीन साल से स्टेडियम में कई कार्य कराएं गए। इनमें से एक था स्टेडियम के अंदर लगी घास को हटाकर उसकी जगह स्पेशल बरमूड़ा घास लगाना। इसकी कुल लागत थी 82 लाख 83 हजार रूपए। राष्ट्रीय स्तर के मैदान पर इस तरह की घास लगाई जानी चाहिए थी। काम मिला पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्यामसुंदर सोनी के पुत्र के ठेका कंपनी अभिनव कंस्ट्रक्शन को। ठेकेदार ने काम तय समय में पूरा कर लिया। महापौर द्वारा इसका उद्घाटन पिछले साल अगस्त में किया गया। निगम ने ठेकेदार को पूरी राशि का भुगतान तक कर दिया।
लेकिन शर्त के मुताबिक ठेकेदार को घास लगाने के साथ इसकी देखरेख भी पूरे एक साल तक करनी थी। पर ठेकेदार ने घास लगाने के बाद एक दिन भी झांकने तक नहीं गया। इसका नतीजा यह रहा कि मवेशी स्टेडियम के भीतर पूरे एक साल तक आसानी से प्रवेश कर गए और पूरे 82 लाख रूपए की घास को चर गई। गर्मी में पानी नहीं डाला गया। वर्तमान में घास की स्थिति पहले की तरह हो गई। कुलमिलाकर लाखों रूपए ठेकेदारों की मनमानी व अधिकारियों के लापरवाही के चलते डूब गई।
0 स्टेडियम के सामने जोन दफ्तर, फिर भी लापरवाही
स्टेडियम परिसर में ही नगर निगम का टीपीनगर जोन कार्यालय है। जहां दिन भर अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों का आना जाना लगा रहता है। उसके बाद भी इस तरह की घोर लापरवाही की गई। ठेकेदार द्वारा देखरेख नहीं कराने पर तत्काल इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी। लेकिन कर्मचारी उदासीन बैठे रहे। अधिकारी भी मौका मुआयना करने कभी नहीं पहुंचे।
कार्रवाई के आसार नहीं
अधिकारियों के मुताबिक इतने बड़े मामले मेें अब कार्रवाई के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। दरअसल इस मामले का किसे जवाबदार माना जाएं यह तय नहीं किया जा रहा है। जानबुझकर जिम्मेदारी तय करने में लेट किया जा रहा है। बाद में इस मामले मेंं पल्ला झाड़ लिया जाएगा। स्टेडियम में घास लगने के बाद अधिकारियों का क्रिकेट टूर्नामेंट भी कराया गया था।
Updated on:
04 Aug 2018 09:29 pm
Published on:
04 Aug 2018 09:16 pm
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