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कोरबा. जिले का भूजल स्रोत पिछले पांच वर्षों में चार मीटर नीचे चला गया है। पहले पीने योग्य स्वच्छ जल 18 मीटर की खोदाई में ही मिल जाता है। अब वह 22 मीटर तक चला गया है।
पानी की खपत सरकारी अनुमान से कहीं ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी है। खासतौर पर औद्योगीकरण में पानी का काफी ज्यादा बेजा इस्तेमाल हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो इस कारण कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और पीने के पानी की भारी किल्लत हो सकती है। भूजल उस पानी को कहा जाता है जो बारिश और अन्य स्रोतों से ज़मीन के अंदर चला जाता है और जमा होता रहता है।
नए शोध के मुताबिक पूरे छत्तीसगढ़ में भूजल स्तर हर साल तेजी से गिर रहा है। जल्द ही इसे ठीक करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति बेहद चिंताजनक हो सकती है।
इन जिलों की स्थिति सबसे खराब
विगत पांच वर्षों में प्रदेश में औद्योगीकरण बेहद तेजी से हुआ है। पेड़ों की भी अंधाधुध कटाई हुई है। खासतौर से गरियाबंद, महासमुंद, बालोद, राजनांदगांव, बिलासपुर, जांजगीर चांपा, रायगढ़ व जशपुर जैसे जिलों में भूजल स्तर का आंकड़ा भयावह है। जहां वर्ष 2013 की तुलना में भूजल स्तर वर्तमान में 10 मीटर तक नीचे चला गया है।
जल संरक्षण पर लाखों खर्च
सरकारी आंकड़े बताते हैं जल संरक्षण हर साल लाखों करोड़ों रूपए फूंक दिए जाते हैं। लेकिन बावजूद इसके यह सारे प्रयास नाकम हो रहे हैं। जल संचयन का कोई भी प्रयास सफल नहीं हो रहा है।
नहीं मिलती भवन निर्माण की अनुमति
निकाय क्षेत्र में जब भी कोई भवन निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन करता है। तब प्रोजेक्ट रिपोर्ट में वर्षा जल संरक्षण का निर्माण भी दर्शाना होता है। इसके बिना निगम से भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी जाती। नियम तो बने हैं, लेकिन इनका पालन नहीं किया जाता। वर्षा जल संरक्षण के इंतजाम किए गए भी हैं या नहीं अफसर इसकी पुष्टि करने साईट तक जाने की जहमत नहीं उठाते।
छोटे उद्योगों पर भी नहीं हुई कार्रवाई
भूजल स्रोत का दुरूपयोग करने वाले रजगामार रोड स्थित औद्योगिक परिक्षेत्र के छोटे उद्योगों पर कार्यवाई के लिए शासन ने कलेक्टर को पत्र लिखा था।
एक्सपर्ट व्यू
-भूजल को बेतरतीब तरीके से बाहर निकालना, बढ़ती जनसंख्या, माईनिंग और वाटर पॉल्यूशन के कारण ही भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। राष्ट्रीय आंकड़ा और भी भयानक है। कम वर्षा व चारों ओर कांक्रीटीकरण हो जाने के कारण जल जमीन के अंदर इक_ा नहीं हो पा रहा है। जिले की मिट्टी आसानी से जल को सोंख नहीं पाती। इसलिए वर्षा जल को व्यर्थ में बह जाता है। उसे एक स्थान संचय करने की जरूरत है। योजनाबद्ध तरीके जल संचयन करना होगा अन्यथा स्थिति और भी भयानक होगी। शत्रुहन -प्रसाद मिश्रा, भूगर्भशास्त्री
Published on:
09 Aug 2018 12:01 pm
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