चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद नए संयंत्र की स्थापना के भविष्य को लेकर श्रमिक संगठनों में चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि उम्मीद है कि इस नीतिगत निर्णय में सरकार सकारात्मक रुख अपनाएगी।
विधानसभा चुनाव जनता के बीच जाने से ठीक पहले 29 जुलाई को कोरबा के घंटाघर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 1320 मेगावॉट के नए संयंत्र की स्थापना के लिए आधारशीला रखी थी। तब से लोगों के मन में सवाल उठ रहा था कि चुनाव से ठीक पहले नए संयंत्र की आधारशीला रखने का मकदस क्या है? कांग्रेस ने मतदाताओं को साधने की कोशिश तो नहीं है। क्योंकि इसके पहले कांग्रेस की सरकार ने पांच साल में कोरबा में नए संयंत्र की स्थापना को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
चुनावी साल में सरकार ने कोरबा में प्लांट की स्थापना के लिए रायपुर से घोषणा की। इसके बाद कागजी कार्रवाई शुरू की। तब तक चुनाव आ गया। और अब प्रदेश की जनता ने कांग्रेस सरकार सत्ता से बेदखल कर दिया है। इस स्थिति में अब 1320 मेगावॉट के नए संयंत्र का दारोमदार भाजपा की नई सरकार पर टिक गई है। प्लांट के ठंडे बस्ते में जाने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।