
कोरबा में प्रस्तावित 1320 मेगावॉट के नए संयंत्र का दारोमदार नई सरकार पर
चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद नए संयंत्र की स्थापना के भविष्य को लेकर श्रमिक संगठनों में चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि उम्मीद है कि इस नीतिगत निर्णय में सरकार सकारात्मक रुख अपनाएगी।
विधानसभा चुनाव जनता के बीच जाने से ठीक पहले 29 जुलाई को कोरबा के घंटाघर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 1320 मेगावॉट के नए संयंत्र की स्थापना के लिए आधारशीला रखी थी। तब से लोगों के मन में सवाल उठ रहा था कि चुनाव से ठीक पहले नए संयंत्र की आधारशीला रखने का मकदस क्या है? कांग्रेस ने मतदाताओं को साधने की कोशिश तो नहीं है। क्योंकि इसके पहले कांग्रेस की सरकार ने पांच साल में कोरबा में नए संयंत्र की स्थापना को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
चुनावी साल में सरकार ने कोरबा में प्लांट की स्थापना के लिए रायपुर से घोषणा की। इसके बाद कागजी कार्रवाई शुरू की। तब तक चुनाव आ गया। और अब प्रदेश की जनता ने कांग्रेस सरकार सत्ता से बेदखल कर दिया है। इस स्थिति में अब 1320 मेगावॉट के नए संयंत्र का दारोमदार भाजपा की नई सरकार पर टिक गई है। प्लांट के ठंडे बस्ते में जाने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
महंत की चुनावी रेल बंद हुई, पूर्व सांसद महतो के प्रयास से नाम बदलकर नियमित चली
हसदेव2014 की लोकसभा चुनाव से कुछ दिन पहले कोरबा के पूर्व सांसद डॉ. चरणदास महंत की पहल पर रेलवे ने कोरबा से रायपुर से बीच कुछ दिन के लिए इंटरसिटी एक्सप्रेस चलाने की घोषणा की। लोकसभा चुनाव के बाद केन्द्र की सत्ता बदल गई। भाजपा सरकार ने इंटरसिटी एक्सप्रेस को बंद कर दिया। कई माह तक इंटरसिटी बंद रही। यात्री परेशान हुए। आंदोलन तक हुए। इसे चालू कराने के लिए तत्कालीन सांसद डॉ. बंशीलाल महतो ने कड़ी मेहनत की। केन्द्रीय रेल मंत्री से कई बार मुलाकात की। केन्द्र पर दबाव बनाया और आखिरकार कोरबा से रायपुर के बीच हसदेव एक्सप्रेस चालू हुई। भाजपा सरकार ने नाम बदलकर यह ट्रेन दोबारा कोरबा के लोगों को दिया।
भाजपा शासन में हुआ डीएसपीएम का निर्माण और पश्चिम संयंत्र का विस्तार
हालांकि कोरबा में बिजली संयंत्र की स्थापना को लेकर भाजपा सरकार ने काफी गंभीरता दिखाई है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह का निर्माण हुआ। 2007 में इस संयंत्र की 250- 250 मेगावॉट की दोनों इकाइयां उत्पादन में आई। कोरबा पश्चिम में 500 मेगावॉट की नई इकाई बनकर तैयार हुई। इससे 2013 से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। मड़वा संयंत्र में 1000 मेगावॉट का नया संयंत्र बना।
Published on:
07 Dec 2023 11:50 am
