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उम्मीद पर फिरा पानी, ट्राइसाइकिल मिलने की उम्मीद लेकर जब कलेकटोरेट पहुंचे विकलांग तो अफसरों ने दिया ये जवाब…

Handicapped: ट्राइसाइकिल मिलने की उम्मीद लेकर विकलांग (Handicapped) जब कलेक्टोरेट जनदर्शन में पहुंचे तो अफसरों के जवाब ने उन्हें मायूस कर दिया। फटकारते हुए ये कहा...

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उम्मीद पर फिरा पानी, ट्राइसाइकिल मिलने की उम्मीद लेकर जब कलेकटोरेट पहुंचे विकलांग तो अफसरों ने दिया ये जवाब...

उम्मीद पर फिरा पानी, ट्राइसाइकिल मिलने की उम्मीद लेकर जब कलेकटोरेट पहुंचे विकलांग तो अफसरों ने दिया ये जवाब...

कोरबा. छह दिव्यांग मंगलवार को कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे और कहा-साहब ट्राइसाइकिल चाहिए। अधिकारी बोले- नहीं है ट्राइसाइकिल। यह सुनकर दिव्यांग मायूस हो गए। ट्राइसाइकिल के बिना ही घर लौट गए। मंगलवार को छह दिव्यांग ट्राइसाइकिल मिलने की आस लेकर कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे थे। दिव्यांगजनों ने अपनी समस्या से अवगत कराया। ट्राइसाइकिल की मांग की।

इस दौरान अधिकारियों ने सभी दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल नहीं होने का हलावा दिया। दिव्यांग मायूस हो गए। जिस उम्मीद से दिव्यांग आए थे, इसके विपरीत उन्हें मायूस होना पड़ा। दिव्यांगों ने अपनी समस्याएं मीडिया को बताई। उन्होंने बताया कि बिना ट्राइसाइकिल के गंतव्य स्थान तक आने-जाने के लिए किसी साथी या फिर परिवार के सदस्य का सहारा लेना पड़ता है। ट्राइसाइकिल के लिए कई बार आवेदन दिया गया है, लेकिन हर बार नहीं होने का हवाला दिया जाता है।

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बताया जाता है कि विभाग दिव्यांगों को ट्राइसाइकिल नहीं होने की बात कहकर लौटा रहा है, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। इंदिरा स्टेडियम स्थित गोदाम में सैंकड़ों की संख्या में ट्राई व 12 मोटराईज ट्राइसाइकिल रखी हुई है। दिव्यांगजनों की ट्राइसाइकिलें धूल खा रही है।

छह साल से नहीं मिली पेंशन, ट्राइसाइकिल भी नहीं
ग्राम कोलगा निवासी दिव्यांग महेश राम (60) ने बताया कि छह साल से पेंशन की राशि नहीं मिल रही है। ट्राइसाइकिल भी नहीं है। उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रह है। वह अपने आपको असहाय महसूस कर रहा है। उसने बताया कि परिवार में उसकी पत्नी है। खेती कर दोनों जीवन निर्वहन कर रहे हैं। बावजूद इसके सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं से वंचित हैं। महेश सरकारी योजना का लाभ लेने की आस लेकर कलेक्टोरेट पहुंचा था।

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-बैशाखी के सहारे चलने में काफी परेशानी हो रही है। ट्राइसाइकिल की उम्मीद लेकर जनदर्शन आया हुआ था। यहां अधिकारी साइकिल नहीं होने की बात कह रहे हैं। इससे पहले भी कई बार आवेदन दिया जा चुका है। दुकाल राम, गंगदेई पखनापारा

-ट्राइसाइकिल तो है, लेकिन मोटराइज नहीं है। ट्राइसाइकिल को हाथ से चलाने में काफी बल लगता है, इससे काफी परेशानी होती है। चढ़ाव वाले स्थान पर कई बार साइकिल विपरीत दिशा की ओर चलने लगती है। इस दौरान काफी परेशानी होती है। शेखर चौहान, मुड़ापार बस्ती