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पार्किंग तो दूर, बैठने तक की जगह नहीं, मरीज व परिजन होते हैं परेशान

निजी अस्पतालों में मरीजों की सुविधा की अनदेखी

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कोरबा

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Shiv Singh

May 23, 2018

पार्किंग तो दूर, बैठने तक की जगह नहीं, मरीज व परिजन होते हैं परेशान

पार्किंग तो दूर, बैठने तक की जगह नहीं, मरीज व परिजन होते हैं परेशान

कोरबा . नर्सिंग होम एक्ट में निजी अस्पतालों के लिए मरीजों से जुड़ी सुविधाओं का सख्त प्रावधान होने के बावजूद शहर के कई अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने में लगातार अनदेखी की जा रही है। एक्ट में पार्किंग और अस्पताल के स्थापना स्थान के मापदण्डों तक का उल्लेख है, जबकि जिले के कई निजी अस्पतालों में मरीजों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। पीक ऑवर में मरीजों को फर्श या अस्पताल के बाहर अपनी बारी का इंतजार करते हुए देखा जा सकता है।
जिले के ज्यादातर बड़े नर्सिंग होम, अस्पताल व क्लीनिक निहारिका क्षेत्र में है। कई अस्पताल बेहद संकरे रोड व गलियों में भी मौजूद है जबकि इनके संचालन के लिए भी शासकीय नियमों व दिशा-निर्देश हैं। निजी अस्पतालों में ओपीडी खुलते ही मरीजों का तांता लगा रहता है। शहरी क्षेत्र के अस्पतालों में तो सुबह छह बजे से मरीज अपना नंबर लगाना शुरू कर देते हैं। कुछ अस्पताल तो ऐसे भी हैं जहां फोन से मरीजों का नंबर नहीं लगाया जाता। इन सभी व्यवस्थाओं के कारण मरीज सुबह से अस्पताल पहुंचना शुरू कर देते हैं। फिर चाहे वह बच्चे, बूढ़े या महिला मरीज क्यों न हों। अब मरीज एक बार अस्पताल पहुंचने पर यहीं बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। अधिकांश अस्पतालों में इन मरीजों के सुविधाजनक बैठने तक की व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में मरीजों अस्पताल के बाहर या कई बार तो फर्श पर बैठकर इंतजार करते हैं। गंभीर मरीजों व महिलाओं के साथ आने वाले परिजनों सड़क पर बैठने के लिए मजबूर हैं। इस तेज धूप में मरीजों के परिजन अधिकांश निजी अस्पतालों के मुख्य द्वार पर बैठे मिल जाएंगे। इनके लिए गर्मी के मौसम में बैठना सजा से कम नहीं है। इसकी वजह यह है कि न जाने कब डाक्टर दवाएं लाने या पैसे का इंतजाम करने के लिए बोल दे।

मरीजों की संख्या तय नहीं
अस्पतालों के मालिक चिकित्सक एक समय में आने वाले मरीजों की संभावित संख्या से वाकिफ होते हैं कि कितने मरीज आराम से बैठकर इंतजार कर सकते हैं। हालांकि कुछ चिकित्सकों ने अच्छी व्यवस्था की है। दिन भर में यदि किसी अस्पताल की क्षमता से ज्यादा मरीज भी अस्पताल में नंबर लगवा लें तो उन्हें मना नहीं किया जाता।

-निजी अस्पतालों में यदि मरीजों को जरूरत से ज्यादा इंतजार करवाया जा रहा है। इस दौरान बैठने की व्यवस्था व अन्य असुविधाओं से दो चार होना पड़ रहा है, तो अस्पतालों से इसकी जानकारी लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. पीएस सिसोदिया, सीएमएचओ, कोरबा