12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ऊर्जाधानी के निवासियों को बरतनी होगी अतिरिक्त सावधानी, आपदा प्रबंधन विभाग ने किया आगाह इस लिहाज से बेहद संवेदनशील

आकाशीय वज्रपात की वजह से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु

2 min read
Google source verification

कोरबा

image

Shiv Singh

Aug 01, 2018

आकाशीय वज्रपात की वजह से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु

आकाशीय वज्रपात की वजह से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु

कोरबा. छत्तीसगढ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश के कोरबा सहित रायगढ़, महासमुंद और बस्तर जिले को अत्यधिक वज्रपात वाले जिले की श्रेणी में चिन्हांंिकत किया है। आकाशीय वज्रपात की वजह से प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु एवं जन धन की हानि होती है। सामान्यत: जून से सितम्बर माह में वज्रपात की अत्याधिक घटनायें होती है।


उल्लेखनीय है कि कोरबा में इस वर्ष भी कई लोगों व मवेशियों की मौत हो चुकी है और बड़े स्तर पर धनहानि भी हुई लेकिन पीडि़त परिवारों को जरूरत के हिसाब से मुआवजा नहीं मिलता है। राज्य शासन द्वारा वज्रपात की घटनाओं के दौरान जनधन की हानि को रोकने एवं बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील आम नागरिकों से की गई है।

राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वज्रपात/आकाशीय बिजली से बचने के लिए कई जरूरी सावधानियां बरती जा सकती है। इनमें एक यह भी है कि यदि घर में हो तो पानी का नल, फ्रिज, टेलीफोन आदि को न छुएं और उससे दूर रहे तथा बिजली से चलने वाली यंत्रों/उपकरणों को बंद कर दें। यदि दो पहिया वाहन, साईकिल, ट्रक खुले वाहन नौका आदि पर सवार हो तो तुरंत उतरकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।

Read more- Video Gallery : हाथियों के भय से रात भर जागते रहे ग्रामीण, दो हाथियों ने तीन ग्रामीणों का मकान ढहाया, देखिए वीडियो...


वज्रपात/आकाशीय बिजली के दौरान वाहनों पर सवारी न करें। धातु की डंडी वाले छातों का उपयोग न करें। टेलीफोन व बिजली के पोल/खम्भे तथा टेलीफोन टावर से दूर रहे। कपड़े सुखाने के लिए तार का प्रयोग न करें। जूट या सूत की रस्सी का उपयोग करें। बिजली की चमक देख तथा गडगड़़ाहट की आवाज सुनकर ऊंचे एव एकल पेड़ों पर नहीं जायें। यदि आप जंगल में हो तो छोटे एवं घने पेड़ों की शरण में चले जाये। वृक्षों दलदल वाले स्थलों तथा जल स्रोतों से यथा संभव दूर रहे परंतु खुुले आकाश में रहने से अच्छा है कि, छोटे पेड़ों के नीचे रहे।

खुले आकाश में रहने को बाध्य हो तो नीचे के स्थलों को चने। एक साथ कई आदमी इक्_े न हो। दो आदमी की दूरी कम से कम 15 फीट हो। तैराकी कर रहे लोग, मछुवारे आदि अविलंब पानी से बाहर निकल जाये। गीले खेतों में हल चलाते, रोपनी या अन्य कार्य कर रहे किसानों तथा मजदूरों या तालाब में कार्य कर रहे व्यक्ति तुरंत सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर जाये। धातु से बने कृषि यंत्र, डंडा आदि से अपने को दूर कर लें।


सुझाव में यह भी कहा गया है कि यदि आप खेत-खलिहान मे काम कर रहे हो, तथा किसी सुरक्षित स्थान की शरण न ले ताए तो- जहां है वही रहे, हो सके तो पैरों के नीचे सूखी चीज जैसे लकड़ी ,प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते रख लें। दोनों पैरों को आपस में सटा लें एवं दोनों हाथों को घुटनों पर रखकर सिर को जमीन की तरफ यथा संभव झुका लें।