
नहीं हो रहा कीटनाशक का छिड़काव, बारिश होते ही मच्छरों से हलाकान लोग
कोरबा. मच्छरों का प्रकोप बढऩे लगा है, लेकिन फाङ्क्षगग मशीनों का पता नहीं है। स्टोर में मशीनें खड़ी हुई हैं। इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। रिहायशी इलाकों के साथ-साथ बस्तियों में भी मच्छरों का आतंक बढ़ते जा रहा है। अब जब दूसरे शहरों में डेंगू से मौत हो रही है तो निगम के अमले की नींद टूटी है।
इस सीजन में मच्छरों के प्रकोप को कम करने के लिए कोई खास पहल अब तक नहीं दिख रही है। पिछले दो साल में निगम द्वारा फागिंग मशीन के बजाएं मैलाथ्यान स्प्रे के माध्यम से मच्छरों के प्रकोप को कम करने पर काम किया गया। इसके बाद फिर से इस स्प्रे को बंद कर फाङ्क्षगग मशीन से छिड़काव के लिए येाजना बनाई गई। पिछले साल निगम ने लाखों की लागत से तीन नई फागिंग मशीनें खरीदी गई थी। इसके कुछ दिन बाद इससे छिड़काव भी शुरू किया गया। लेकिन बाद में छिड़काव के लिए आवश्यक कीटनाशक की खरीदी पर कुछ अड़चनों की वजह से देरी हो गई। वर्तमान में भी मशीनें निगम के स्टोर में खड़ी है। स्प्रे से काम लिया जा रहा है।
औद्योगिक उपक्रम भी लापरवाह,सफाई ना छिड़काव
निगम क्षेत्र की कॉलोनियों के आलावा औद्योगिक उपक्रम वाले कॉलोनियों में भी मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। उपक्रम के अफसर भी सफाई व कीटनाशक छिड़काव को लेकर लापरवाही कर रहे हैं। विद्युत कंपनी के पूर्व व पश्विम कॉलोनी, एसईसीएल के पंपहाउस, मानिकपुर, दीपका, कुसमुंडा व बलगी में काफी ज्यादा परेशानी बढ़ी है। उपक्रम द्वारा भी सफाई सहित अन्य व्यवस्था निगम के भरोसे छोड़ दिया जाता है।
शासकीय कार्यालयों के आसपास गंदगी, मच्छरों का प्रकोप
जिले के भी शासकीय कार्यालयों के भीतर व बाहर भी गंदगी का आलम है। खुद कलेक्ट्रोरेट परिसर के भीतर सीढिय़ों में कबाड़ रख दिया गया है। आसपास झाडिय़ां उग चुकी है। एसडीएम दफ्तर के आसपास भी सफाई नहीं हो रही है। जिला पंचायत कार्यालय, जनपद पंचायत सहित जिले के कॉलेजों व स्कूलों का भी वहीं हाल है। कई कबाड़ पड़े समान में पानी भरा हुआ है जिससे मच्छर पनप रहे हैं।
नालियों में ब्लीचिंग पाउडर डालना जरूरी, पर निगम नहीं दे रहा ध्यान
शहर में अब भी बहुत सारे ऐसे मोहल्ले हैं जहां की नालियां ढंकी नहीं गई है। साथ ही ऐसे गलियों में सीवरेज को भी लोगों ने नाली से जोड़ दिया है। उन जगहों पर मच्छरों से लोग सबसे अधिक परेशान है। ऐसी जगहों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करना चाहिए। जिससे मच्छरों पर अंकुश लग सके।
फिर से मैलाथ्यान के भरोसे, दो मशीन-दो कर्मी
इधर एक बार फिर निगम फागिंग मशीन के बजाएं मैलाथ्यान से कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है लेकिन वार्डों में इसके लिए कर्मियों व मशीन की संख्या बढ़ानी चाहिए थी। एक जोन में कम से कम 10 मशीन आवश्यक थी, ताकि हर वार्ड के लिए अलग-अलग मशीन हो, और इतने ही इस मशीन को चालाने वाले कर्मी की भी तैनाती की जानी चाहिए थी, ताकि निरंतर कीटनाशक का छिड़काव हो सके। महज दो मशीन और दो कर्मियों के भरोसे मच्छर भगाना मुश्किल साबित हो रहा है। हर वार्ड तक छिड़काव नहीं हो पा रहा है।
पानी जमाव वाले स्थलों में कारगर नहीं
ताया गया कि स्प्रे मशीन का प्रभाव सिर्फ उसी स्थान पर होगा जहां पर इसका छिड़काव किया जा रहा होगा। खासकर ऐसे स्थान जहां पर पानी अधिक मात्रा में जमा होता है, और तालाब से लगे बस्तियों में भी मच्छरों से परेशानी बनी हुई थी। क्योंकि स्प्रे मशीन से सिर्फ तालाब के चारों ओर ही स्प्रे हो सकेगा, बीच में मच्छरों को नहीं भगाया जा सकता था।
आयुक्त की अपील, घरों में भी सफाई पर ध्यान दे लोग
एडिज मच्छर स्थित साफ पानी में पनपते हैं, कूलरकी पानी की टंकी ,पक्षियों के पीने के पानी का बर्तन, खुले हुए ओव्हरहेड टैंक, छतों में रूका बरसाती पानी नियमित रूप से खाली किया जाए व धूप में सुखाने के बाद उपयोग में लाया जाए। घरों के दरवाजे व खिड़कियों में जाली पर्दे लगाए तथा सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। आयुक्त रणबीर शर्मा के निर्देश पर निगम के स्वच्छता विभाग द्वारा नालियों एवं रूके हुए पानी स्प्रे पम्प के माध्यम से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
-फागिंग मशीन के लिए भी अनुमति मिल गई है कल से इसे शुरू कर दिया जाएगा। मैलाथ्यान स्प्रे का वार्डों में छिड़काव शुरू कर दिया गया है। आम लोग भी अपने घरों में कहीं पानी जमा ना होने दें। जागरूक करने के लिए मोहल्लों में पाम्पलेट का वितरण कराया जाएगा।
-वीके सारस्वत, स्वास्थ्य अधिकारी, निगम कोरबा
Published on:
11 Aug 2018 08:32 pm
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