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कल से अस्तित्व में आ जाएगा ये नया जिला, 11 महीने आमरण-अनशन के साथ 40 साल तक चला संघर्ष

New district: नया जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर का सीएम करेंगे शुभारंभ, 1983 में पहली बार मनेंद्रगढ़ (Manendragarh) को नया जिला बनाने की उठी थी मांग, 13 दिन कफ्र्यू के बीच लोगों की गुजरी थी जिंदगी, मनेंद्रगढ़ के तत्कालीन कांग्रेस विधायक अपनी सरकार के खिलाफ बैठे थे आमरण अनशन पर

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New district

Protest for new district Manendragarh

बैकुंठपुर. New district: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा के एक साल बाद 9 सितंबर 2022 को मनेंद्रगढ़ को जिला बनाने की 40 साल की लंबी लड़ाई पर पूर्ण रूप से विराम लग जाएगा। मनेंद्रगढ़ को अलग जिला बनाने अविभाजित मध्यप्रदेश में सबसे लंबा 11 महीने तक आमरण अनशन हुआ था और आंदोलन को काबू करने 13 दिन शहर में कफ्र्यू लगाना पड़ा था। हालांकि मनेंद्रगढ़ को जिला बनाने की घोषणा के बाद रायपुर में जनप्रतिनिधियों व आम जनता से चर्चा कर नवीन जिला का नाम मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर रखा गया है।


मनेंद्रगढ़ जिला बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले पहली बार वर्ष 1983 में मांग उठी थी और २९ जनवरी १९८३ से क्रमिक आमरण अनशन हुआ, जो 84 दिन तक चला था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह (मध्यप्रदेश) ने चर्चा करने मनेंद्रगढ़ से एक प्रतिनिधि मंडल को भोपाल बुलाया। स्व. रतन लाल मालवीय के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल को भोपाल भेजा गया।

उस दौरान न्यायमूर्ति बीआर दुबे को आयोग का अध्यक्ष बनाने की अनुशंसा और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी के मध्य साजापहाड़ में जिला मुख्यालय बनाने मांग रखी थी। हालांकि अविभाजित मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 1998 में सरगुजा को विभाजित कर बैकुंठपुर (पश्चिमी सरगुजा, वर्तमान में कोरिया) को अस्थायी रूप से जिला मुख्यालय घोषित कर दिया। ऐसे में मनेंद्रगढ़ के नागरिक नाराज हो गए और वृहद आंदोलन शुरु कर दिया।

करीब 11 महीने तक आमरण अनशन हुआ और आंदोलन को काबू में करने 13 दिन शहर में कफ्र्यू लगाना पड़ा था। उस दौरान करीब 200 आंदोलनकारी को शहडोल, रामानुजगंज सहित अन्य जेल में बंद रखा गया था।

85 साल की बुजुर्ग महिला ने अनशन की संभाली थी कमान
तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने लिखित में सूचित किया कि जिला मुख्यालय आयोग की अनुशंसा के अनुरूप ही बनाया जाएगा। स्थल चयन के लिए संभागायुक्त बिलासपुर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया। परंतु गठित कमेटी ने आयोग की अनुशंसा को दरकिनार कर बैकुंठपुर को जिला मुख्यालय बनाने प्रतिवेदन दिया। इससे बैकुंठपुर को स्थायी जिला घोषित किया गया था।

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इसी घोषणा के कारण मनेंद्रगढ़ की जनता बहुत ज्यादा आक्रोशित हुई और मनेंद्रगढ़ में एक ऐतिहासिक आंदोलन का शंखनाद कर दिया गया। तत्कालीन कांग्रेस विधायक स्व गुलाब सिंह (अपनी सरकार के खिलाफ) एवं आम जनता आमरण अनशन पर बैठ गए। इस बीच 7 दिन मनेन्द्रगढ़ को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर सशस्त्र पुलिस पुलिस को मनेन्द्रगढ़ में भ्रमण कराया गया। आमरण अनशन 11 महीने चला।

फिर पुलिस बल ने अनशन करने वालों को उठवा लिया। आंदोलन को खत्म होता देख 85 वर्षीय वृद्धा बच्ची बाई के नेतृत्व में शहर की महिलाएं आमरण अनशन में बैठी थी। उसी समय रामानुज अग्रवाल, अजीमुद्दीन गुड्डा एवं जहूर भाई आदि भोपाल जाकर आमरण अनशन पर बैठ गए थे। अनशन के सातवें दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस नेता रविंद्र चौबे को अनशन स्थल पर भेज प्रकरण के निराकरण करने आश्वस्त किया था।

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जिला बनने की है काफी खुशी
1998 में जिला बनाने के लिए आंदोलन की शुरुआत हुई थी। तब पहली बार मैंने अनशन में बैठा तो लोग उत्साहित होकर रक्त का तिलक लगाते थे। आज हमारी मांग पूरी होने वाली है। उसके लिए सीएम का हृदय से आभारी हैं। जिला बनने की खुशी इतनी अधिक है कि शब्द नहीं मिल रहे हैं।
रमाशंकर गुप्ता, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष जिला बनाओ संघर्ष समिति मनेंद्रगढ़