
Women sit on protest for Manendragarh district
बैकुंठपुर. स्वतंत्रता दिवस की 75वीं सालगिरह पर सीएम भूपेश बघेल की घोषणा के साथ मनेंद्रगढ़ को जिला बनाने की 38 साल की लंबी लड़ाई पर पूर्णविराम लग गया। अविभाजित मध्यप्रदेश में सबसे लंबा 11 महीने तक आमरण-अनशन हुआ था और आंदोलन को काबू करने 13 दिन शहर में कफ्र्यू लगाना पड़ा था।
मनेंद्रगढ़ जिला बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले पहली बार वर्ष 1983 में मांग उठी थी। 29 जनवरी 1983 से क्रमिक आमरण-अनशन हुआ और 84 दिन चला था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने चर्चा करने मनेंद्रगढ़ से एक प्रतिनिधि मंडल को भोपाल बुलाया था।
स्व. रतन लाल मालवीय के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल को भोपाल भेजा गया था। इस दौरान न्यायमूर्ति बीआर दुबे को आयोग का अध्यक्ष बनाने की अनुशंसा और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी के मध्य साजापहाड़ में जिला मुख्यालय बनाने मांग रखी गई। दुबे आयोग ने बैकुंठपुर को जिला बनाने के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था।
हालांकि राज्य शासन ने वर्ष 1998 में सरगुजा को विभाजित कर बैकुंठपुर(पश्चिमी सरगुजा, वर्तमान में कोरिया) को अस्थायी रूप से जिला मुख्यालय घोषित कर दिया। इससे मनेंद्रगढ़ के नागरिक नाराज हो गए और वृहद आंदोलन शुरू कर दिया।
करीब 11 महीने तक आमरण अनशन हुआ और आंदोलन को काबू में करने 13 दिन शहर में कफ्र्यू लगाना पड़ा था। इस दौरान करीब 200 आंदोलनकारियों को शहडोल व रामानुजगंज सहित अन्य जेलों में बंद रखा गया।
85 वर्षीय बच्ची बाई ने संभाली थी आंदोलन की बागडोर
जिला मुख्यालय आयोग की अनुशंसा के अनुरूप स्थल चयन के लिए संभागायुक्त बिलासपुर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन हुआ था। कमेटी ने आयोग की अनुशंसा को दरकिनार कर बैकुंठपुर को जिला मुख्यालय बनाने प्रतिवेदन दिया।
तत्कालीन विधायक स्व. गुलाब सिंह आम जनता के साथ आमरण अनशन पर बैठ गए। इस बीच 7 दिन मनेन्द्रगढ़ को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर सशस्त्र पुलिस पुलिस को मनेन्द्रगढ़ में भ्रमण कराया गया। अनशन 11 महीने चला। फिर पुलिस ने अनशन करने वालों को उठवा लिया।
इस पर 85 वर्षीय वृद्धा बच्ची बाई के नेतृत्व में महिलाएं आमरण अनशन पर बैठी। उसी समय रामानुज अग्रवाल, अजीमुद्दीन गुड्डा एवं जहूर भाई आदि भोपाल जाकर आमरण अनशन पर बैठ गए थे। अनशन के सातवें दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस नेता रविंद्र चौबे को अनशन स्थल पर भेज प्रकरण के निराकरण का आश्वस्त दिया था।
38 साल के संघर्ष का नतीजा
लम्बी लड़ाई के बाद जिला मिला है। 200 से अधिक लोग जेल गए और संघर्ष किया। 38 साल के संघर्ष का यह नतीजा है।
रामचरित द्विवेदी, वरिष्ठ सदस्य जिला बनाओ संघर्ष समिति मनेंद्रगढ़
Published on:
20 Aug 2021 09:14 pm
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