
एक ही छत के नीचे मिले बुजुर्गों को उपचार...
कोटा. इंडियन एकेडमी ऑफ जीरियाट्रिक्स जीरियोकॉन-2018 के 16वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन शनिवार को मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संासद ओम बिरला ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को एक ही छत के नीचे सभी स्वास्थ्य जांच और उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए। विशिष्ट अतिथि कोटा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा सिंह ने कहा कि उम्र बढऩा एक बॉयलोजिकल प्रक्रिया है। इस पर नियंत्रण नहीं है।
अध्यक्षता कर रहे कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरीश वर्मा ने जीरियाट्रिक को अलग विभाग बनाने की पहल करने वाले डॉ. अरविंद माथुर को याद किया। उन्होंने विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी शारदा के प्रयासों को भी सराहा। इंडियन एकेडमी ऑफ जीरियाट्रिक्स की राष्ट्रीय अध्यक्ष जी शांति ने कहा कि यहां आगामी समय में बुजुर्गों की तादाद दुगुनी हो सकती है। उनके केयर अभी से होनी चाहिए। कई मेडिकल कॉलेजों ने काम करना शुरू कर दिया है।
एकेडमी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. प्रशंात मैथ्यू व आयोजन समिति के सचिव डॉ. मयंक श्रीवास्तव भी मंचासीन थे। कार्यक्रम में महापौर महेश विजय व एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक गोविंद माहेश्वरी भी विशेष रूप से मौजूद रहे। संचालन शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक शारदा, प्रसूती विशेषज्ञ डॉ. रत्ना जैन ने किया। डॉ. मीनाक्षी शारदा ने स्वागत भाषण में सेमीनार के सत्रों एवं नर्सिंग प्रशिक्षण के बारे में बताया। कोयंबटूर की डॉ. अलका गणेशन ने दिल के रोग में दवाओं के साइड इफेक्ट के बारे में बताया। तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. दीपिका मित्तल ने किया।
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के निर्देशक प्राचार्य डॉ. आरके आसेरी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एम.एल. अग्रवाल, डॉ. महेश पंजाबी, डॉ. मोहन मंत्री आदि भी मौजूद रहे। अतिथियों ने स्मारिका का विमोचन किया। रविवार को समापन सत्र में यूके के चिकित्सक डेविड ह्यूसन का व्याख्यान होगा।
एमडी जिरियाट्रिक्स चालू की जाएगी
प्राचार्य डॉ. गिरीश वर्मा ने बताया कि कोटा मेडिकल कॉलेज में एमडी जीरियाट्रिक्स का डिग्री कोर्स शुरू करने की तैयारी है। कॉलेज में न्यूरोलॉजी आउटडोर, हड्डी व नाक, कान के रोगों के आउटडोर संकाय चालू है। सभी जांचें हो रही है। एकछत के नीचे जांचे हों उसके प्रयास किए जाएंगे।
बुजुर्गों का कॉम्प्रहेसिंव ट्रीटमेंट हो
न्यूजीलैण्ड में मानुकाओ हैल्थ सेंटर में क्लीनिकल हैड डॉ. सुनीता पॉल ने कहा कि आस्ट्रेलिया में अलग से जीरियाट्रिक्स सेवाओं का चलन बढ़ा है। भारत में भी अब हर साल 15 पीजी डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। बजुर्गों के लिए काम्प्रहेंसिव ट्रीटमेेंट की आवश्यकता है। नर्सिंग कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं में संतुलन हो
चंडीगढ़ जीरियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. एसएस लहल नेे कहा कि आयुर्वेद समेत विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं में संतुलन कायम रखना जरूरी है। बुजुर्ग अन्य वैकल्पिक दवाओं का भी सेवन करते हैं। कभी-कभी साइड इफेक्ट हो जाता है। आयुर्वेद के शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित नहीं है। विश्व चिकित्सा साहित्य में इन्हें शामिल किया जाना चाहिए।
राजस्थान में 5 केंद्र श्रेष्ठ काम कर रहे है
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की सहायक निदेशक डॉ. गौरी एन सेन गुप्ता ने कहा कि राजस्थान वरिष्ठजन स्वास्थ्य योजना में 5 केंद्र काम कर रहे हैं। पूरे देश में 20 मेडिकल कॉलेज में रीजनल सेंटर है। जोधपुर में केंद्र काम कर रहा है। हम सिफ ारिश करेंगे कि हर मेडिकल कॉलेज में एमडी जीरियाट्रिक्स कोर्स चालू हो।
Published on:
09 Dec 2018 01:39 pm
