OMG: मौत के आंकड़ों को निगल गई सरकार... आवारा मवेशियों से छह साल में गई 36 जाने लेकिन कहा दो ही मरे

OMG: मौत के आंकड़ों को निगल गई सरकार... आवारा मवेशियों से छह साल में गई 36 जाने  लेकिन कहा दो ही मरे

Suraksha Rajora | Publish: Jul, 12 2019 07:00:00 AM (IST) Kota, Kota, Rajasthan, India

कागजों में दिखा दिए छह साल में 26 हजार आवारा मवेशी पकड़े

 

कोटा. शहर की जनता आवारा मवेशियों का दंश झेल रही है। पिछले छह साल में आवारा मवेशियों की समस्या शहर में जानलेवा साबित हो रही है। छह साल में 36 से अधिक लोगों की अकाल मौत हो गई। बड़ी संख्या में लोग आवारा मवेशियों के कारण दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल हो गए, लेकिन सरकार ने आवारा मवेशियों की मौत के आंकड़ों के सच को छुपा लिया है।

सरकार ने विधानसभा के पटल पर गुरुवार को आवारा मवेशियों की मौत के जो आंकड़े दिए हैं, उससे शहर के लोग हैरान हैं। सरकार ने कहा कि कोटा में छह साल में केवल दो लोगों की आवारा मवेशियों के कारण मौत हुई है और एक व्यक्ति घायल हुआ है। आवारा मवेशियों aawara maveshi के सड़क पर आने से शहर के समीप पिछले रविवार को ही एक व्यक्ति की अकाल मौत हो गई थी।

बालिका की मौत पर शहर सन्न रह गया था, उसे भी झुठला दिया
सितम्बर 2016 को महावीर नगर में 15 वर्षीय छात्रा अंजना मीणा की आवारा सांड की चपेट में आने से अकाल मौत हो गई थी। छात्रा की मौत से पूरा शहर सन्न रह गया था। बालिका के परिजनों को सांत्वना देने खुद महापौर विजय, विधायक संदीप शर्मा, सांसद और निगम के अधिकारी पहुंचे थे। उस बालिका की मौत का सच भी झुठला दिया है। जबकि बालिका के पिता ने आवारा मवेशियों के कारण अंजना की मौत के लिए निगम को जिम्मेदार ठहराते हुए पत्र भी लिखा था।

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विधायक भरतसिंह का सवाल और सरकार का जवाब

प्रश्न : 2013 से 2019 तक कोटा शहर में कुल कितने लोगों को आवारा पशुओं ने घायल किया व इसके कारण कितने लोगों की मौत हुई, वर्षवार सूची सदन की मेज पर रखें।

जवाब : वर्ष 2013 से 2019 तक कोटा शहर में आवारा पशुओं से दो व्यक्तियों की मृत्यु हुई है एवं एक महिला घायल हुई है।
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सवाल : क्या यह सही है कि आवारा सांड, गाय व श्वान से कोटा स्मार्ट सिटी के लोग परेशान हैं। सरकार द्वारा उक्त समस्या के समाधान के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
जवाब : जी हां। नगर निगम कोटा द्वारा वर्ष 2013 से वर्ष 2019 तक कुल 26141 आवारा गौवंश को पकडा गया है। नगर निगम की ओर से सतत प्रक्रिया के तहत आवारा गौवंश को पकड़ा जाकर गौशाला में भिजवाया जा रहा है।

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सवाल : क्या सरकार आवारा पशुओं के कारण हुई मृत्यु पर मृतक के परिवार को आर्थिक मदद प्रदान करती है, यदि नहीं, तो क्यों।

जवाब : नगर निगम कोटा द्वारा गाय, सांड या श्वान के काटने से हुई मौत पर मृतक के परिवार को आर्थिक मदद प्रदान नहीं की गई है। आवारा गौवंश से हुई मृत्यु पर आर्थिक मदद दिए जाने का नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
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सरकार की पोल खोलते शहर के लोग
- पिछले साल मेरे पिता रामचन्द्रपुरा में घर के बाहर घूम रहे थे। अचानक दो सांड लड़ते हुए सड़क पर आ गए और पिता को सींंग से उठाकर दूर फेंक दिया। एक पैर में फ्रेक्चर हो गया था। पन्द्रह दिन अस्पताल में भर्ती रहे थे।

- नरेश हाड़ा, पूर्व पार्षद
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पिछले साल अक्टूबर में गुमानपुरा में मेरी बुजुर्ग पत्नी सुबह घर से मंदिर जा रही थी, अचानक एक गाय ने पत्नी को सींंग से उठाकर फेंक दिया। एक हाथ और पैर में फेक्चर हो गया था। काफी दिनों तक इलाज चला था।
- जितेन्द्र कुमार जैन

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आवारा मवेशियों की समस्या और इससे हो रही मौतों का मामला पिछले साल बोर्ड बैठक में उठाया था। मेरे वार्ड में अंजना मीणा की मौत आवारा सांड के कारण हुई थी। छह साल में आवारा मवेशियों से 40 से 50 लोगों की मौत हो चुकी है।

- महेश गौतम लल्ली, अध्यक्ष राजस्व समिति
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महापौर भी सरकार के साथ नहीं
आवारा मवेशियों के कारण लोगों के दुर्घटनाग्रस्त होने की बात तो आए दिन सामने आती है। कई लोग घायल हुए हैं, यह भी सच है। निगम के पास आवारा मवेशियों के कारण मौत के कोई आंकड़े नहीं होते। आवारा मवेशियों की समस्या के लिए लगातार प्रयासरत हैं। पिछले दो साल से तीन आयुक्तों को आवारा मवेशियों के टैगिंग करवाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी तक टैगिंग नहीं हो पाई है।

- महेश विजय, महापौर
आवारा मवेशी

मौतों के आंकड़े पूर्णतया गलत, चुनौती दंूगा : भरतसिंह
कोटा में आवारा मवेशियों से लोगों की मौतों और दुर्घटनाग्रस्त होने के झूठे आंकड़े विधानसभा में दिए गए हैं। सरकार के इस जवाब से मैं बिल्कुल भी सन्तुष्ट नहीं हूं, इसको चुनौती दूंगा। 2013 से 2019 तक कितने लोगों की मौत हुई है, एक-एक मौत का आंकड़ा मेरे पास है। अफसर झूठ बोलने के आदी हो गए हैं। सरकार ने जिन दो लोगों की मौत और एक को घायल होना बताया है, वह तो मेरी जानकारी में ही नहीं था। आवारा मवेशियों से कोटा शहर में होने वाली मौतों के आंकड़ों को छुपाया या झुठलाया नहीं जा सकता। शहर के लोगों को पता है। इस मुद्दे को मैं फिर उठाऊंगा। जिस तरह सांड मस्त है, उसी तरह अधिकारी भी मस्त हैं, किसी को कोई चिंता या डर नहीं है।
- भरतसिंह, विधायक सांगोद

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