
कोटा /नोताडा. अक्षय तृतीया के अवसर पर किसानों ने सुबह सुरज निकलने से पहले ही खेतो पर पहुंच कर मुहुर्त साधने कि रस्म निभाई इस दौरान किसान अपने साथ सात अनाज व खेजडी का डंठल लेकर गये ओर उसको अपने खेतों के बीच में रखकर अपने खेत व कृषि कार्यों का पुजन कर आगामी वर्ष में अच्छी फसल के पैदावार कि कामना की ।
अक्षय तृतीया मुहूर्त से क्षेत्र के किसानों ने खेतों में बीज बोकर खेती कार्य की शुरुआत कर दिया है। विशेषकर अक्षय तृतीया के दिन तो क्षेत्र के ज्यादा किसानों द्वारा धान बोया गया। इसके लिए किसानों द्वारा खेतों को जुताई-खुदाई कर बोने येाग्य मिट्टी तैयार कर ली गई थी, वहीं वे किसान जो समय के भाव या अन्य कारणों से बोनी नहीं कर पाए, वे पुरोहित से तिथि ज्ञात कर बोनी की शुरुआत करेंगे।
वे इस तिथि को इतना शुभ मानते है कि इसके लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं समझते है। इसके लिए पूर्व रात्रि से ही सारी तैयारी कर ली जाती है। किसान सूर्योदय के पूर्व ही बीज बोकर घर वापस आ जाते है। वहीं इस दिन खीर-पूड़ी सहित मिष्ठान बनाते हैं। जिसे स्वयं ग्रहण कर परिजनों को भी खिलाते है। किसानों ने बताया की प्राचीन समय से चली आ रही मान्यता के अनुरूप हर वर्ष इस दिन शुभ बुआई शुरु करते है।
दिवारो पर उकेरे कृषि कार्यों व फसलो के चित्र
अक्षय तृतीया के अवसर पर किसानों के मकानों मकानो के बाहर कृषि कार्य सम्बंधित हल, कुली, व फसलो मे ज्वार बाजरा के चित्र उकेरे गये।
यह बनता है आज किसानों के घर भोजन
आज के दिन किसानों के घर पर लापसी, व मुंग की दाल ओर पराठे का भोजन बनाकर आराध्य देवो के भोग लगाकर अपने कृषि कार्यों में वर्षभर काम करने वाले मजदूरों को भोजन करवाया जाता है।
लेन देन के लीए विशेष
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लेन देन के कार्य के लीए अक्षय तृतीया का दिन महत्वपूर्ण है किसान अपने आवश्यकता के लीए किसी से कर्ज लेता है उसकी भी आज के दिन की ही कोल रहती है ओर वर्ष भर काम करने वाले मजदूरों को भी लेन देन किया जाता है।
आज के दिन का अबुझ सावा
लोग हर कार्यो को करने के लिए मुहुर्त निकालकर करते हैं लैकिन आज का दिन ऐसा दिन है जिसमे मुहुर्त कि जरुरत नही होती है आज का दिन विवाह करने के लिए भी शुभ माना जाता है अक्षय तृतीया के दिन विवाह करने वालो के लिए मुहुर्त निकलवाने कि जरुरत नही होती।