मैसेज नहीं आए तो पता चला घपला है : वेतन से कटौतियां होने के बाद मैसेज मोबाइल पर नहीं आए तो शिक्षकों ने ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी सहित उच्च अधिकारियों को इस मामले अवगत कराया। इसके बाद लिपिक की कारस्तानी की जांच के लिए शिक्षा विभाग ने टीम भेज दी। जांच दल ने सारे रिकार्ड खंगाले, बैंक में जाकर शिक्षकों के खातों को जांचा। ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से किसको कितना भुगतान हुआ इसकी सूची बनाई। सूची देख जांच दल के होश उड़ गए। महज 40 खातों में 76 लाख की राशि जमा होने पर बाबू संदेह के घेरे में आ गया। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने जांच के लिए पांच सदस्यी विशेष दल बनाया। महालेखा नियंत्रक जयपुर इसके बाद जांच करने पहुंचा। वर्ष 2009 से 31 मार्च 17 तक के वाउचर खंगाले तो जांच में 2 करोड़ 29 लाख का गबन सामने आया। उधर बीकानेर शिक्षा निदेशालय की तरफ से मामले की जांच चार कर्मचारियों की तरफ से हुई। पिछले दिनों ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से उनकी रवानगी हो गई, लेकिन यह नहीं बताया कि जांच में कितने का गबन सामने आया। जानकार सूत्रों के अनुसार अभी जिन दो विभागीय कर्मचारियों के खाते में गबन की राशि स्थान्तरित हुई थी शिक्षा विभाग ने उनसे वेतन के माध्यम से कटौती चालू कर दी है, लेकिन ऐसी फर्म जिनके खाते में पांच से 45 लाख की रकम जमा हुई, उनसे वसूली की कार्यवाही नहीं हुई है।