
विधायक चन्द्रकांता ने भेजे २९ पत्र, कहा इंसाफ दिलाओ
कोटा। रामगंजमंडी की विधायक चन्द्रकांता मेघवाल को अपशब्द कहने का मामला चार महीने बाद दुबारा बाहर आया है। १२ मई २०१८ को कोटा उत्तर के विधायक ने एक सरकारी बैठक में मेघवाल को अपशब्द कहे थे। इस मामले के बाद कोटा की राजनीति गर्मा गई थी। मेघवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को मामले की शिकायत की थी। लेकिन पार्टी और सरकार ने उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। इसकेबाद मेघवाल थक कर शांत बैठ गई थी। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कोटा आगमन के कुछ घंटे पहले उन्होंने इस मामले को उठाया है और दो दर्जन से अधिक पत्र भेजे हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, समेत एक दर्जन केन्द्रीय मंत्रियों, जिनमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरूण जेटली भी शामिल है। वहीं राज्य के अनेक मंत्रियों, भाजपा के पदाधिकारियों समेत अनेक अधिकारियों को पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में ‘उचित कार्रवाई’ की मांग की गई है। मेघवाल के पति नरेन्द्र पाल वर्मा ने बताया कि चार महीने से वे सरकार की ओर से कार्रवाई करने का इंतजार कर रहे थे। सरकार और संगठन ने उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया और कोई कार्रवाई नहीं की। इसलिए अब वे दुबारा सभी को पत्र भेज कर आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने पहले सरकार और संगठन से कोटा उत्तर के विधायक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अनुमति मांगी थी। जिसका सरकार और संगठन ने जवाब नहीं दिया। ऐसे अगर अब भी सरकार और संगठन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करता है तो वे अपनी और से कानूनी कार्रवाई करेंगे।
पार्टी एक बार कर चुकी है निष्कासित - सीएमएचओ को धमका चुकेकोटा. कोटा उत्तर विधायक की ओर से विधायक चंद्रकांता मेघवाल से की गई अभद्रता से इस तरह का कोई पहला मामला नहीं है। करीब तीन साल पहले गुंजल तत्कालीन सीएमएचओ को भी धमका चुके हैं। उन्होंने १७ दिसम्बर २०१४ की रात धमकाते हुए कहा था कि ‘मैं दो मिनट में तुम्हारी तबीयत ठीक कर दूंगा। एेसा खौफ पैदा कर दूंगा कि बच्चों को भी नींद नहीं आएगी।’ उनकी बातचीत का ऑडियो भी वायरल हुआ था। सिफ ारिश ना मानने पर गुंजल को सीएमएचओ पर इतना गुस्सा आया कि वो धमकाने लगे। दरअसल, उन्होंने एक मेल नर्स को उसकी मनमाफि क जगह पर पोस्िटंग कराने की सिफ ारिश की थी। जब ऐसा नहीं हुआ तो गुंजल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पर भडक़ गए, जमकर अभद्रता की। दस साल पहले आरक्षण आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री के खिलाफ अमर्यादित बयान देने पर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
Published on:
21 Sept 2018 06:00 am
