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नहीं मिली एम्बुलेंस, बेटे के सामने स्ट्रेचर पर मां का दम टूटा

कोटा के एमबीएस अस्पताल का मामला  

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नहीं मिली एम्बुलेंस, बेटे के सामने स्ट्रेचर पर मां का दम टूटा

नहीं मिली एम्बुलेंस, बेटे के सामने स्ट्रेचर पर मां का दम टूटा

कोटा. कोटा के एमबीएस अस्पताल से रैफ र किए मरीज को शनिवार को मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल तक ले जाने के लिए डेढ़ घंटे तक एम्बुलेंस नहीं मिली। नए अस्पताल नहीं पहुंचने पर रामपुरा निवासी 71 वर्षीय शारदा देवी की मौत हो गई। उनके बेटे प्रेमचंद गोयल व पंकज गोयल ने अपनी मां को एमबीएस अस्पताल परिसर में संचालित ओपीडी के बाहर अपनी आंखों के सामने स्ट्रेचर पर ही दम तोड़ते हुए देखा। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

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मृतका के बड़े बेटे प्रेमचंद गोयल ने बताया कि मां को सांस लेने में तकलीफ थी। सुबह अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। उन्होंने 108 एम्बुलेंस व 100 नम्बर पर डायल किया, लेकिन किसी ने फ ोन उठाया। इसके बाद वह अपने छोटे भाई के साथ मां को स्कूटर पर बिठाकर सुबह 9.30 बजे एमबीएस अस्पताल पहुंच गए। वहां चिकित्सक ने उनकी ईसीजी, एक्स-रे और अन्य जांचें लिखी। करीब दो घंटे में जांचें करवा ली गई। 11.30 बजे रिपोर्ट को लेकर चिकित्सकों के पास पहुंचे तो उन्होंने ब्लड की कमी होना बताया और नए अस्पताल में रैफ र करने की बात कही, लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिली।

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निजी एम्बुलेंस को जाने के लिए किया मना
प्रेमचंद गोयल ने बताया उन्हें निजी एम्बुलेंस से मां को ले जाने के लिए मना किया गया। अस्पताल स्टाफ ने स्वीकृत एम्बुलेंस से ही मरीज को ले जाने की बात कही। इसके बाद वह सरकारी स्वीकृत एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन एम्बुलेंस नहीं आई। फिर स्ट्रेचर पर ही मां ने दम तोड़ दिया।

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मरीज को गंभीर हालात में अस्पताल लेकर आए थे। यहां चिकित्सकों ने उसे देखा। उसके बाद 15 मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई। एम्बुलेंस वहीं खड़ी थी, लेकिन स्टाफ क्यों नहीं लेकर गया। इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई करेंगे।
डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल