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मछली के जाल में फंस गया मगरमच्छ

शहर के मत्स्य विभाग के पौंड में गुरुवार दोपहर मछली पकडऩे के लिए विभाग की ओर से लगाए गए जाल में मगरमच्छ आ फंसा।

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 रावतभाटा में मत्स्य विभाग

रावतभाटा में मत्स्य विभाग के पौंड से मत्स्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा पकड़ा गया मगरमच्छ।

रावतभाटा.
शहर के मत्स्य विभाग के पौंड में गुरुवार दोपहर मछली पकडऩे के लिए विभाग की ओर से लगाए गए जाल में मगरमच्छ आ फंसा। जब मत्स्य विभाग के कर्मचारियों ने जाल खींचा तो उनके होश उड़ गए। जाल में मछलियों के साथ करीब साढ़े ५ फीट का मगरमच्छ फंसा हुआ था।
इस पर मत्स्य विभाग के कर्मचारियों ने जाल में ही उलझाकर उसे दबोच लिया तथा उसे पकड़कर उसके मुंह पर टेप लगाई तथा रस्सियों से बांधा। सूचना मिलने पर वन विभाग के कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे तथा मगरमच्छ को बरामद कर चंबल नदी में जाकर छोड़ा।

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यहां है कई मगरमच्छ -
रावतभाटा का मत्स्य विभाग राज्य का सबसे बड़ा मत्स्य पालन केन्द्र है। यहां मत्स्य विभाग की भूमि चंबल नदी की डाउन स्ट्रीम से सटी है। ऐसे में नदी से जुड़ा होने व पौंड में मछलियां होने से यहां कईमगरमच्छ आ बसे हैं। यहां विभाग के दर्जन भर से भी अधिक मछली पालन के पौंड है।

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मगरमच्छ ने ली थी युवक की जान -
रावतभाटा से चंबल नदी की डाउनस्ट्रीम में दिसम्बर २०१७ के अंत में एक मगरमच्छ ने नदी में ट्यूब पर बैठकर मछली पकड़ रहे एक युवक पर हमला कर उसकी जान ले ली थी।

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राज्य का सबसे बड़ा मत्स्य केन्द्र -
रावतभाटा का राणा प्रताप सागर स्थित मत्स्य केन्द्र अपनी विशालता के कारण राज्य का सबसे बड़ा मत्स्य पालन केन्द्र हैं। यहां मत्स्य विभाग में एक दर्जन से अधिक पौंड बने हुए है। चंबल नदी से सटा होने व यहां मछलियां उपलब्ध होने से मगरमच्छों को यह जगह खासी रास आ रही है।


वन्यजीवों को भी लुभाता है -
राणा प्रताप सागर की डाउनस्ट्रीम में होने के कारण व कई बीघा में फैले इस मत्स्य पालन केन्द्र में हरियाली व पानी होने के अलावा सूनापन रहता है। ऐसे में यह स्थान मगरमच्छों के अलावा अन्य वन्यजीवों को भी भाता है। यहां जरख, लोमड़ी, जंगली बिल्लियां, नेवले, कोबरा समेत कई प्रकार के वन्यजीव पाए जाते है।