
हर चुनाव में बढ़ जाता है इनकी जीत का आंकड़ा, भाजपा ने फिर जताया भरोसा..
कोटा. लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र से मौजूदा सांसद ओम बिरला को दोबारा प्रत्याशी बनाया है। 17 वर्ष की उम्र मेें अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत करने वाले बिरला को भाजपा ने 2014 में प्रत्याशी बनाया था। इससे पहले वे कोटा की दक्षिण विधानसभा सीट ले लगातार तीन बार विधायक रहे हैं। 2003 में पहला चुनाव लड़ा और हाड़ौती के कद्दावर नेता शांति धारीवाल को मात देकर दमखम दिखाया था इसके बाद 2008 में और 2013 में भी लगातार जीत हासिल की। खास बात यह रही की हर चुनाव में इनकी जीत का अंतर बढ़ता गया।
2014 का जनादेश
2014 में बिरला ने कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व राजपरिवार के सदस्य इज्यराज सिंह को भारी मतों से हराया था। इस चुनाव में ओम बिरला को 644,822 मत मिले थे, जबकि कांग्रेस के इज्यराज सिंह को 444,040 वोट मिले थे ।
भाजपा का गढ़ कहलाता है हाड़ौती
आजादी के बाद बनी इस लोकसभा सीट पर वैसे तो दोनों ही पार्टियों के प्रतिनिधि जीतकर संसद जाते आए हैं लेकिन जनसंघ के जमाने से ही यहां पहले जनता पार्टी और अब भाजपा का दबदबा रहा है। कोटा और बूंदी जिले इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। 1952 में हुए पहले चुनाव में देशभर में कांग्रेस की लहर होने के बावजूद यहां राम राज्य परिषद के प्रत्याशी रामचंद्र सेन ने जीत दर्ज की थी। कुल 16 चुनावों में 7 बार भाजपा 7 बार कांग्रेस, एक बार जनसंघ व एक बार राम राज्य परिषद की जीत हुई।
जातिगत समीकरण
सामाजिक ताना-बाना लोकसभा चुनाव 2014 के मुताबिक कोटा-बूंदी में कुल 17, 06,627 वोटर्स थे । यहां ब्राह्मण, राजपूत, मीणा और गुर्जर मतदाताओं का खासा प्रभाव है। कोटा -बूंदी लोकसभा सीट का गठन 2008 में किया गया था, इससे पहले यह क्षेत्र कोटा के नाम से ही जाना जाता था। इस सीट पर कांग्रेस को 1962, 1967, 1971, 1984, 1998 और 2009 में जीत मिली थी । लेकिन बीजेपी का कमल यहां पहली बार 1980 में खिला। मोदी लहर में पिछली बार यहां पार्टी की बंपर जीत हुइई। जीत भी ऐसी मिली कि यहां से तत्कालीन सांसद और पूर्व राजपरिवार के सदस्य को करारी हार का सामना करना पड़ा।
Updated on:
22 Mar 2019 07:32 pm
Published on:
22 Mar 2019 07:29 pm
