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पहले पीकेसी लिंक नहर परियोजना सियासत में उलझी, अब ईआरसीपी

पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को लेकर केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के बीच सियासत जारी है। इस योजना से पहले हाड़ौती की पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक नहर परियोजना भी सियासी उलझनों की भेंट चढ़ गई थी, जिसका करीब एक दशक बाद अभी तक क्रियान्वयन नहीं हो सका है।    

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कोटा. पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को लेकर केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के बीच सियासत जारी है। इस योजना से पहले हाड़ौती की पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक नहर परियोजना भी सियासी उलझनों की भेंट चढ़ गई थी, जिसका करीब एक दशक बाद अभी तक क्रियान्वयन नहीं हो सका है। पीकेसी लिंक नहर परियोजना जलशक्ति मंत्रालय की ओर से तैयार की गई राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत चिह्नित की गई 30 लिंक परियोजनाओं में से एक थी। पीकेसी लिंक परियोजना राजस्थान और मध्यप्रदेश दो राज्यों से जुड़ी थी। यह योजना मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्यों के बीच जल बंटवारे पर आम सहमति नहीं होने के कारण अटक गई। इसका क्रियान्वयन नहीं किया जा सका। अब राजस्थान सरकार ने चंबल बेसिन के कुछ उप बेसिनों के कैचमेंट और कालीसिंध और पार्वती के जलग्रहण क्षेत्र में उपलब्ध अधिशेष जल का उपयोग करने के लिए पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना तैयार की है, लेकिन इसे राष्ट्रीय महत्व की योजना का दर्जा नहीं मिल पाया है।

राज्य सरकार ने इस तरह बनाई योजनाराजस्थान सरकार ने 50 प्रतिशत निर्भरता पर उपलब्ध लगभग 3500 एमसीएम पानी का उपयोग करने की योजना बनाई है। इससे पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में पेयजल आवश्यकता को पूरा करने के साथ 2 लाख हैक्टेयर भूमि के नए कमांड क्षेत्रों को सिंचाई प्रदान करने और मौजूदा कमांड एरिया में लगभग 0.80 लाख हैक्टेयर के िस्थरीकरण का प्रस्ताव दिया है।जल आयोग की शर्त, मध्यप्रदेश से लें एनओसीपानी के डायर्वजन में अंतरराज्यीय नदियां शामिल हैं। केन्द्रीय जल आयोग ने सितम्बर 2018 में राजस्थान से अनुरोध किया था कि या तोे पानी की उपलब्धता के लिए 50 प्रतिशत निर्भरता से 75 प्रतिशत निर्भरता के लिए ईआरसीपी की योजना पर फिर से विचार करें। ऐसा नहीं हो तो मध्यप्रदेश से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करें। मध्यप्रदेश सरकार ने 75 प्रतिशत निर्भरता पर ईआरसीपी के सभी घटकों की योजना बनानेे पर जोर दिया है।

प्रस्ताव में संशोधन होने पर ही विचार करेगा केन्द्र

चंबल नदी के जल का बेहतर उपयोग करने की दृष्टि से नदियों को आपस में जोड़ने का निर्णय लिया गया था। इसमें दोनों राज्यों के बीच कुनो और पार्वती की उप घाटियों में लगभग 131 एमसीएम पानी के आदान-प्रदान का प्रस्ताव था। कालीसिंध उप बेसिन में भी इसी तरह का आदान-प्रदान संभावित है। पीकेसी लिंक के साथ ईआरसीपी के एकीकरण के मुद्दे पर दोनों राज्यों के साथ विचार विमर्श हो चुका है। एकीकरण के मुद्दों का अभी हल किया जाना बाकी है। विशेष रूप से अंतरराज्यीय नदियों में पानी डायवर्जन के लिए निर्भरता मापदंड के संबंध में राजस्थान सरकार ने ईआरसीपी के लिए 50 प्रतिशत निर्भरता पर योजना बनाई है। केन्द्र के अनुसार यह 75 प्रतिशत होना चाहिए। नदियों को आपस में जोड़ने पर कार्य बल ने गत 17 मई 2022 को हुई बैठक में पहले चरण के तहत संशोधित प्रस्ताव पर योजना को आगे बढ़ाने की सिफारिश की है।----

मध्यप्रदेश की आपत्ति निराधार

राजस्थान के जल संसाधन मंत्री महेन्द्रजीत मालवीया का कहना है कि परियोजना राज्य के 13 जिलों के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार इसकी क्रियान्विति के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। इसे गति देने के लिए 86 अधिकारियों की नियुक्ति भी की जा चुकी है। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से जताई जा रही आपत्ति निराधार है, उनसे एनओसी प्राप्त करने की भी कोई आवश्यकता नहीं है।--

केन्द्रीय जल शक्ति विभाग का यह तर्कमध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच ईआरसीपी के संबंध में अंतरराज्यीय मुद्दों के सौहार्दपूर्ण समाधान के अभाव में केंद्रीय जल आयोग की ओर से परियोजना का आकलन नहीं किया गया है। किसी योजना को वित्त पोषण के लिए शामिल किए जाने के लिए उसका केंद्रीय जल आयोग की ओर से आकलन किया जाना महत्वपूर्ण मापदंड है।