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बाढ़ पीडि़तों का दर्द: खाने को रोटी और सिर पर छत नहीं, बिजलियां कड़कती तो कांप जाता कलेजा, कैसे बसाएं उजड़े आशियाने…

Flood in kota: बाढ़ पीडि़त लोगों को अब आशियाने की चिंता सता रही है। राज्य सरकार की तरफ से उन्हें मदद नहीं मिली है।  
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कोटा

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Zuber Khan

Sep 25, 2019

Flood in Kota

बाढ़ पीडि़तों का दर्द: खाने को रोटी और सिर पर छत नहीं, बिजलियां कड़कती तो कांप जाता कलेजा, कैसे बसाएं उजड़े आशियाने...

कोटा. बाढ़ प्रभावित निचली बस्तियों में रहने वाले लोगों को अब आशियाने की चिंता सता रही है। राज्य सरकार की तरफ से उन्हें मदद नहीं मिली है। ऐसे में बाढ़ पीडि़तों का कहना है कि कैसे वापस अपना जीवन पटरी पर ला पाएंगे। हनुमानगढ़ी निवासी सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि वह हलवाई है। बाढ़ से पूरा मकान उजड़ गया।

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भोजन बनाने का पूरा समान बह गया। ऐसे में रोजगार का संकट खड़ा हो गया। तीन हजार रुपए का कमरा किराए पर लेकर रहे हैं। चिंता सता रही है कि वह किराया भी कैसे चुका जाएंगे। बापू नगर निवासी प्रेमलता बाई ने बताया कि मकान के बाहर बोड़ी लगाकर सामान बेचकर घर का गुजारा चला रही थी। बोड़ी बाढ़ में बह गई। घर का सारा सामान बह गया। अब खाने के भी लाले पड़ गए। आटा मांगकर काम चला रह हैं।

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बापू नगर निवासी मंगल ने बताया कि वह रोजाना फेरी लगाकर सजावटी सामान बेचकर अपना परिवार का गुजारा कर रहा था। जमा पंूजी से मकान बनाया था, लेकिन बाढ़ में मकान ढह गया। उसके तीन बच्चे हैं। अब चिंता सता रही है कि कैसे गुजारा होगा, कैसे वापस घर बनेगा।