
कोटा. शहर में इन दिनों मौसमी बीमारियों का प्रकोप बना हुआ है, लेकिन मरीजों के लिए बुखार में सबसे ज्यादा उपयुक्त कॉमन दवा पैरासिटामोल कोटा के सरकारी अस्पतालों में अनमोल हो गई। आउटडोर में आने वाले तो दूर भर्ती मरीजों को भी यह दवा नहीं मिल रही है। मरीजों को मजबूरन बाहर से दवा खरीदनी पड़ी है। इसके लिए उन्हें चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई मरीज उसी से मिले-जुले साल्ट की दवा देकर काम चला रहे हैं।
ये रखी डिमांड मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में साल 201८-19 के लिए आरएमसीएल से 35 लाख 85 हजार गोलियों की डिमांड की गई थी। इसमें मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस (एमसीडब्ल्यू) में 80 हजार गोलियों की सप्लाई हुई। वहीं मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस से पुराने स्टॉक से अस्पतालों में 2 लाख 92 हजार 350 गोलियों की सप्लाई की गई। लोकल स्तर पर खरीद के लिए 4 लाख 44 हजार गोलियों की एनएसी जारी हुई।
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एनएसी जारी होने के बाद भी सप्लायर फ र्म ने पर्याप्त मात्रा में दवा सप्लाई नहीं की, जबकि पिछले साल की दवा खपत की बात करें तो केवल एमसीडब्ल्यू से ही 21 लाख 94 हजार 600 गोली सप्लाई की गई थी। इधर, दवा सप्लाई नहीं होने के चलते मरीजों को बुखार कम करने के लिए डाइक्लोफेनिक, मेफेनामिक एसिड, एसिक्लोफेनिक जैसी अन्य दवा दी जा रही है, जो एलर्जी वाले मरीजों के लिए इतनी सुरक्षित नहीं है।
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रेट के चक्कर मे फं सी सप्लाई मेडिकल कॉलेज से लोकल स्तर पर दवा सप्लाई के टेंडर किए गए थे। टेंडर 5 फ र्म को जारी किया गया था। टेंडर के मुताबिक पैरासिटामोल 500 एमजी दवा की कीमत सबसे कम (5 रुपए की 100 गोली) अग्रवाल डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा डाली गई। सूत्रों की मानें तो कम रेट पर आरसी जारी होने के कारण नुकसान होने के चलते फ र्म द्वारा दवा की सप्लाई नहीं की जा रही, जबकि सभी अस्पताल प्रशासन द्वारा बार-बार डिमांड जारी की जा रही। मेडिकल कॉलेज प्रशासन कार्रवाई की बजाए चुप्पी साधे बैठा है।
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एक्सपर्ट व्यू : पैरासिटामोल का विकल्प नहीं
मरीज के बुखार को कम करने के लिए पैरासिटामोल बेहद जरूरी है, इसका कोई विकल्प नहीं है। अस्पताल में जितने भी मरीज आते हैं। उनमें से 90 प्रतिशत मरीजों को पैरासिटामोल ही लिखते हैं। विकल्प उस केस में लिखना पड़ता है, जब मरीज बताए कि पैरासिटामोल से उसे एलर्जी है। उनमें भी कई मरीज बार-बार डाइक्लोफेनिक या अन्य दवा नहीं ले पाता, क्योंकि ये इतनी सुरक्षित नहीं है। पैरासिटामोल हर लिहाज से सुरक्षित है, इसलिए बुखार के मरीजों को ज्यादातर पैरासिटामोल लिखी जाती है।
डॉ. मनोज सालूजा, सीनियर फिजिशियन, मेडिसिन
नया अस्पताल : सालाना डिमांड 20 लाख गोली
जानकारी के मुताबिक नए अस्पताल में सीजन में प्रतिदिन औसत 2800 मरीजों की ओपीडी रहती है। इनमें से 50 प्रतिशत मरीज बुखार के रहते हैं। एमसीडब्ल्यू के रिकॉर्ड के मुताबिक नए अस्पताल में सालाना डिमांड 20 लाख गोली की है। आरएमसीएल के जरिए फ रवरी माह तक 55 हजार 800 गोलियों की सप्लाई हुई है। वहीं अस्पताल की डिमांड के मुताबिक अक्टूबर माह में एमसीडब्ल्यू को 1 लाख गोलियों की एनएसी जारी हुई है। जानकारी के मुताबिक सप्लायर फ र्म द्वारा ये गोलियां सप्लाई नहीं की गई।
एमबीएस अस्पताल : सालाना डिमांड 10 लाख गोली
जानकारी के मुताबिक एमबीएस अस्पताल में सीजन में प्रतिदिन औसत 18०० मरीजों की ओपीडी रहती है। इनमें से 50 प्रतिशत मरीज बुखार के होते हैं। एमसीडब्ल्यू के रिकॉर्ड के मुताबिक आरएमसीएल से जरिए फरवरी माह तक 1 लाख 88 हजार गोलियों की सप्लाई हुई है। वहीं अस्पताल की डिमांड के मुताबिक नवम्बर माह में तीन बार व एक बार फरवरी माह में मिलाकर एमसीडब्ल्यू से 3 लाख 40 हजार गोलियों की एनएसी जारी हुई है।
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बारां जिले के छबड़ा निवासी जितेन्द्र कुमार बैरागी (25) आठ दिन से बुखार, पेट दर्द से पीडि़त है। परिजनों ने उसे एमबीएस अस्पताल के इमजरेंसी मेडिसिन वार्ड में बेड नम्बर-4 पर भर्ती कराया। चिकित्सकों ने बुखार के लिए पैरासिटामोल दवा लिखी, लेकिन डीडीसी काउंटर पर दवा नहीं मिली। परिजनों ने बाहर से दवा खरीदकर मरीज को दी।
तलवंडी निवासी छात्रा दीक्षा को बुखार आया। उसने चिकित्सकों को दिखाया। पैरासिटामोल दवा लिखी, लेकिन नए अस्पताल में दवा नहीं मिली। बाद में उसने बाहर से दवा खरीदी।
रामपुर अस्पताल : सालाना डिमांड साढ़े 3 लाख
रामपुरा जिला अस्पताल में सरकारी ड्रग वेयर हाउस एमसीडब्लू द्वारा 9 हजार गोलियों की सप्लाई की गई, वहीं डिमांड के मुताबिक 22 नवम्बर को 2 हजार गोली की एनएसी जारी हुई।
इनका यह कहना
पैरासिटामोल आरएमसीए के माध्यम से ड्रग वेयर हाउस में आती है, लेकिन दवा वहां भी उपलब्ध नहीं है। रेट कॉन्टे्रक्ट वाली फर्म को भी ऑर्डर दिया, लेकिन उसने भी उपलब्ध नहीं कराई। उसकी एवज में दूसरे सोर्स से हम दवा प्राप्त कर रहे हैं। अभी हमने ३० हजार दवा की डिमांड की है। एनएसी प्राप्त होने के बाद ही ऑर्डर जारी होगा।डॉ. देवेन्द्र विजयवर्गीय, अधीक्षक, नए अस्पताल में पैरासिटामोल दवा उपलब्ध नहीं है। कुछ समय पहले लोकल स्तर पर मंगवाई थी, वो कम थी। इस दवाई की खपत ज्यादा है। दवा खरीद के लिए प्राचार्य महोदय को पत्र लिखा है। डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल
दवा की खपत ज्यादा है
रामपुरा अस्पताल में फि लहाल 300-400 गोलियों का स्टॉक है। जल्द ही व्यवस्था करवाएंगे।डॉ. एचएल मीणा, कार्यवाहक अधीक्षक, रामपुरा जिला अस्पताल