
Kota's Big Issue : कोटड़ी तालाब को मरने से बचा लो सरकार, अतिक्रमण से घोंटा जा रहा गला
के.आर. मुण्डियार
कोटा.
कुछ दशक पहले कोटा की जनता ने अनंतपुरा तालाब को मरते देखा और अब ऐतिहासिक कोटड़ी तालाब पर संकट आ गया है। कोटड़ी तालाब में मलबा डालकर गला घोटा जा रहा है। तालाब के किनारे व पेटे की जमीन कब्जाने के लिए अतिक्रमियों में होड़ मची दिखाई दे रही है।
पत्रिका टीम ने शुक्रवार को मौके पर जाकर कोटड़ी तालाब के हालात देखे। जिस तरह तालाब के किनारे मलबा डाला जा रहा है, उससे तालाब सिकुड़ने की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। कोटड़ी की तरफ से रामचन्द्रपुरा तक तालाब की पाल व पेटे के अंदर अतिक्रमण किया जा रहा है। तालाब किनारे जो निर्माण पहले से हो रखे हैं, उनका दायरा भी बढ़ रहा है। कई जगहों पर तालाब की पाल पर बने निर्माणों के दरवाजे तालाब के अंदर खोलकर मिट्टी डालकर जगह घेरी जा रही है। कुछ जगह तो ट्रैक्टर की ट्रॉली से मलबा डालकर जगह पर अतिक्रमण किया जा रहा है।
दायीं नहर के पानी से भरता है तालाब-
चम्बल की दायीं नहर कोटड़ी तालाब से होकर आगे बढ़ती है। जब नहर में जलप्रवाह चालू रहता है तब यह तालाब भरा रहता है। लेकिन नहर में पानी बंद रहने के दौरान तालाब पेटे तक खाली हो जाता है। इसी दौरान तालाब के किनारे पर अतिक्रमण करने की गतिविधियां बढ़ जाती है।
प्रशासन ही जिम्मेदार-
कुछ साल पहले चम्बल की दायीं नहर के किनारे स्टील ब्रिज बजरंग नगर से अस्सी फीट रोड तक सड़क का निर्माण किया गया था। प्रशासन ने यह सड़क तालाब की जमीन पर बनाई। गूगल मेप पर कोटड़ी तालाब को देखेंगे तो नहर के दोनों तरफ जलस्रोत नजर आ रहा है, लेकिन वर्तमान में नहर के एक तरफ तालाब की जमीन पर आबादी बस चुकी है। कोटड़़ी की तरफ जो तालाब बचा हुआ है, उस पर भी अतिक्रमियों की नजर पड़ गई है।
तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण-
लोगों का कहना है कि तालाब केे किनारे अतिक्रमियों ने पक्के मकान बना लिए हैं और प्रशासन सो रहा है। प्रशासन व सीएडी के अधिकारियों ने कभी आकर तालाब के हालात नहीं देखे। प्रशासन ने तालाब को मरने के लिए अपने हाल पर छोड़ दिया है। कुछ छुटभैया नेता भी अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सीवरेज व सड़क खुदाई का मलबा व कचरा तक तालाब में डाला जा रहा है। यों ही चलता रहा तो तालाब का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
शिकायतों पर ध्यान नहीं-
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ समय पहले कोटड़ी भोई मोहल्ले के पीछे तालाब की पाल पर 4-5 मकान और शमा कॉलोनी के पीछे करीब 20 से 25 मकान बना दिए गए। शमा कॉलोनी के पीछे तो तालाब में मलबा डालकर पाटने का काम अभी जारी है। स्थानीय लोगों की लिखित शिकायत करने के बावजूद नगर निगम ने ध्यान नहीं दिया।
14वीं शताब्दी का तालाब-
इतिहास के जानकार फिरोज अहमद ने बताया कि कोटड़ी तालाब रियासतकाल से भी पूर्व 14वीं शताब्दी का है। इसके साथ ही गणेश तालाब भी इसी समय का था, लेकिन वहां कॉलोनियां आबाद हो गई। कोटड़ी तालाब भी नहर के दूसरे किनारे बजरंगनगर की तरफ तक फैला हुआ था, लेकिन अतिक्रमण के चलते तालाब सिमटता जा रहा है।
सवाल :
कोटड़ी तालाब में लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण के लिए कौन जिम्मेदार है। उपेक्षा के शिकार जलस्रोतों को कैसे बचाया जा सकता है।
इनका कहना है-
कोटड़ी तालाब के बीच से नहर निकल रही है। तालाब में अतिक्रमण की कोई जानकारी नहीं है। अतिक्रमण हो रहा है तो इसके सोमवार को दिखवाया जाएगा।
-लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा
(सहयोग : हाबूलाल शर्मा, नीरज)
Published on:
14 May 2022 06:04 am
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