
World Heritage Day: पोपाबाई को मिला ऐसा श्राप की कलयुग के भगवान भी हो गए जमींदोज, पढि़ए, रहस्यमय कहानी...
कोटा. कलयुग के जिस God का करोड़ों लोगों को बेसब्री से इंतजार है। उन lord Vishnu अवतार 'कल्की' की प्रतिमाएं यहां एक हजार साल से जमींदोज पड़ी हैं। यह जिक्र है Queen Popa bai के उस साम्राज्य का जो 21वीं सदी में अराजकता का पर्याय ही बन गया। पोपोबाई का रावला यानी आवां। जहां सात किमी के दायरे में फैले टीलों में उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के सबसे समृद्ध साम्राज्य का रहस्य आज भी दफन है।
भारतीय पुरातात्विक धरोहरों की समृद्धि का दस्तावेजीकरण करने के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने वर्ष 1903-04 में ब्रिटिश अधिकारियों को सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी। आवां के सांस्कृतिक और व्यावसायिक समृद्धि के किस्सों का पीछा करते हुए अंग्रेज ऑकियोलॉजिस्ट हैनरी केजनस पोपाबाई के रावलों तक आ पहुंचा। वर्ष 1905 में प्रकाशित इस रिपोर्ट में हैनरी ने लिखा कि आवां के मंदिर बेहद पुराने हैं। आठवीं से नौवीं शताब्दी में बने इन अदभुत मंदिरों की हालत बेहद खराब है। जल्द संरक्षित न किया गया तो बेहद अहम सभ्यता जमींदोज हो सकती है। पहली बार दुनिया के सामने आवां की समृद्धि जाहिर हुई थी, लेकिन 114 साल बाद भी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। स्थानीय बुजुर्ग रामप्रसाद कहते हैं कि शायद आवां को पोपाबाई के राज का शाप मिला है। तभी तो एक सदी बाद भी कोई इसकी सुध लेने नहीं आया।
सभ्यताओं का हुआ मिलन
कोटा संग्रहालय की रिपोर्ट के मुताबिक, आवां में 12 प्राचीन मंदिर स्थापित हैं। जबकि पुरातत्व विभाग आठ मंदिर ही मानता है। आवां पर शोध करने वाली इतिहासकार डॉ. सुषमा आहूजा बताती हैं कि मंदिर तो 12 से भी ज्यादा थे और राज्य दो हजार साल से भी ज्यादा पुराना, लेकिन खंडहरों की शक्ल में जो बचा रह गया है। वह 7वीं से 11 वीं शताब्दी के बीच की स्थापत्य कला का नायाब नमूना है।
डॉ. आहूजा कहती हैं कि आखिरी दौर में यहां चालुक्यों से सौहार्द रखने वाले प्रतिहार और परमारों का शासन रहा होगा। अभी बचे रह गए मंदिरों में मरुगुर्जर शैली का चित्रांकन दिखता है। हालांकि मालवा से लेकर गुजरात और हैदराबाद से लेकर मैसूर तक की सभ्यताओं का मेल भी यहां की स्थापत्य कला पर साफ दिखाई पड़ता है।
Updated on:
18 Apr 2019 11:35 am
Published on:
18 Apr 2019 09:00 am
