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holi special : राजस्थान के इस शहर में होली पर होती है विवाह की रस्म, की जाती है आतिशबाजी

फुहड़ता से भरा लोकानुरंजन हडूडा...
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कोटा

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Suraksha Rajora

Mar 19, 2019

कोटा. देश में अलग-अलग संस्कृतियों की तरह त्यौहारों पर होने वाले आयोजन भी भिन्न-भिन्न तरीके से आयोजित किए जाते है। नैनवां में होली पर धुलंडी की शाम होने वाला लोकानुरंजन पर्व फुहड़ता से भरे हडूडा आयोजन का तरीका भी अलग होता है। नायक व नायिका के विवाह की रस्म के लोकानुरंजन पर्व हडूडा को देखने के लिए पूरा कस्बा उमड़ पड़ता है। आतिशबाजी के संग झूमते चलते लोक कलाकारों की टोलियां होली के गीतों की फुहारों में सरोबार बने रहते है।

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नैनवां में धुलंडी की शाम नायक मालदेव व नायिका मालदेवनी के विवाह की रस्म का लोकानुरंजन पर्व हडूडा का रंग इसी तरह बरसता है। आयोजन को अंजाम देने के लिए नैनवां दो पक्षों में बंट जाता है। उत्तर दिशा में बसे कस्बे के लोग नायक मालदेव व दक्षिण दिशा में बसे नायिका मालदेवनी के पक्ष में बंटे थे। शाम 6 बजेे एक तरफ हडूडा के नायक मालदेव की बारात मालदेव चौक से रवाना होती है। आतिशबाजी की छटा के साथ हडूडा के नायक की ऊंट पर बारात रवाना होती है।

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बारात के सबसे आगे मालदेव का झण्डा चलता है उसके पीछे बैण्ड धुन पर लोक कलाकार नृत्यों का धमाल मचाते। नायिका की ओर से मालदेवनी के पक्ष के बारात लेकर पहुंचते है। होली के फुहड़ गीतो के साथ दोनों ओर की बाराते झण्डें की गली पहुंचते है। हडूडा देखने के लिए जनसैलाब उमड़ा रहता है। कोई भंग की तरंग में तो कोई सुरा के सरूर में हडूडे की मस्ती में डूबा रहता है। युवको की टोलियो के ठुमके, दोनों ही पक्षों के लोगों द्वारा झोली में रखकर पताशे व फूल्या लुटाते चल रहे थे आतिशबाजी के संग झूमते चलते लोक कलाकारों की टोलियों होली के गीतों की फुहारों चलाते रहते है।


हो जाते लोटपोट-


झण्डें की गली पहुंचते ही दोनो ही तरफ से युवको में प्रदर्शन करने की होड़ मच गई और हडूडा शुरु होता है। हडूडे में दोनों ही पक्षों की ओर से युवको के फुहड़ व अश्लील प्रदर्शन को देखकर दर्शक लोटपोट होते रहे। प्रदर्शन के दौरान दोनों ही पक्षो के लोग एक दूसरे पक्ष की ओर बढऩे का प्रयास करते तो उनको रोकने के लिए पुलिस बीच में दीवार बनकर खड़ी रहती हडूडे को देखने के लिए झण्डें की गली के आसपास की दुकानों की छते लोगों से अटी रहती है।

कानून व्यवस्था के लिए पुलिस के जवान भी निगरानी के लिए छतों पर तैनात रखा जाता है। आयोजन के दौरान प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भी मौके पर डटे रहते है। हडूडे में नायक व नायिका के विवाह की रस्म के बाद ही वापस रवाना होते है।