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डॉक्टर-इंजीनियर बनने का ख्वाब लेकर कोटा आने वाले 1.25 लाख स्टूडेंट्स भगवान भरोसे, 85% Hostel उड़ा रहे गाइड लाइन की धज्जियां

कोटा. डॉक्टर-इंजीनियर बनने का ख्वाब लेकर कोटा आने वाले सवा लाख से ज्यादा कोचिंग स्टूडेंट्स भगवान भरोसे हैं।

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कोटा

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abhishek jain

Jan 07, 2018

Hostel

कोटा .

डॉक्टर-इंजीनियर बनने का ख्वाब लेकर कोटा आने वाले सवा लाख से ज्यादा कोचिंग स्टूडेंट्स भगवान भरोसे हैं। कोटा में करीब 31200 हॉस्टल पीजी (पेइंग गेस्ट)हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 675 ही किसी एसोसिएशन से पंजीकृत हैं और सरकारी कायदे-कानून भी सिर्फ इन्हीं तक सिमटे हैं, 85 फीसदी पीजी जिला प्रशासन की गाइड लाइन की पूरी पालना नहीं करते।

कोचिंग छात्रों की आत्महत्या के मामले बढऩे पर बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी और तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने हॉस्टल और पीजी संचालकों के लिए गाइड लाइन जारी की थी। प्रशासन ने 19 बिंदुओं वाली इस गाइड लाइन की पालना के लिए सेक्टर कमेटियां भी गठित की थीं, लेकिन जब तक सुरपुर कलक्टर रहे, कमेटियां अस्तित्व में रहीं। उनके जाते ही गाइडलाइन का जिक्र तक बंद हो गया।

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ये थी गाइड लाइन
हॉस्टल-पीजी में अग्निशामक उपकरण लगाएं और ट्रेंड स्टाफ हो।
बच्चों के आने-जाने का समय निर्धारित हो और बायोमेट्रिक हाजिरी लगे।
हॉस्टल में रोशनी-हवा का उचित प्रबंध तथा खेल व योगा एक्टिविटी हों।
हॉस्टल छोडऩे पर तीन दिन में सिक्टोरिटी राशि वापस।
बच्चों का रुटीन बिगड़ता दिखे तो तत्काल अभिभावकों को बताएं।-
हॉस्टल में दिन में 4 बार हाजिरी लगे। सोने से पहले भी कमरे चेक हों।
बावर्दी गार्ड लगें। महिला हॉस्टल्स में वार्डन और स्टाफ फीमेल हों।
हॉस्टल लीज पर न दिए जाएं। विवाद पर संचालक और मालिक जिम्मेदार।
बाथरूम-टॉयलेट नियमित साफ हों, पीने के लिए आरओ वॉटर।
मैस सीढिय़ों के नीचे, बेसमेंट या हॉस्टल के अगले हिस्से में न हो।
हॉस्टल और पीजी ऐसी जगह खोलें जहां फायर ब्रिगेड पहुंच सके।
नशा करता मिलने पर स्टूडेंट को हॉस्टल से निकाला जाए, पुलिस को भी सूचित करें।
कमरों का औचक निरीक्षण हो। छात्र के पास हथियार मिले हॉस्टल संचालक पुलिस कार्रवाई करें।
खाना बनाने की साफ हो, स्वच्छ पानी का इस्तेमाल और कचरे का उचित निस्तारण हो। लिफ्ट है तो लाइसेंस लें, ऑपरेटर तैनात हो।
हॉस्टल के बाहर बोर्ड लगाकर पुलिस, पुकार हेल्पलाइन, होम हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम और निकटवर्ती डॉक्टर का फोन नंबर भी लिखा हो।

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सिर्फ एसोसिएशन्स पर दवाब
जिला प्रशासन ने गाइड लाइन की पालना के लिए हॉस्टल एसोसिएशन्स पर ही दवाब बनाया। इसके चलते इनसे नहीं जुड़े 13 हजार से ज्यादा पीजी और हॉस्टल्स सीधे तौर पर बचे रहे। एसोसिएशन्स में पंजीकृत 675 हॉस्टल और पीजी भी 85 फीसदी गाइड लाइन की पूरी पालना नहीं कर रहे। प्रशासन ने गाइड लाइन की पालना न होने पर हॉस्टल और पीजी का लाइसेंस रद्द करने की घोषणा की थी, लेकिन आठ महीने गुजरने के बाद भी हुआ कुछ नहीं। इधर, 30 हजार से ज्यादा हॉस्टल-पीजी तो अब भी बिना लाइसेंस के ही चल रहे हैं।

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वेरिफिकेशन कराएंगे
कोटा हॉस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन मित्तल का कहना है कि 40 फीसदी हॉस्टल्स में ही बायोमेट्रिक हाजिरी लग पा रही। गल्र्स हॉस्टल में मेल स्टॉफ सिर्फ डाइनिंग एरिया तक ही जाता है। गाइड लाइन की पूरी पालना के लिए जल्द ही हॉस्टल्स का फिजिकल वेरिफिकेशन कराएंगे।

सख्ती की जाएगी
चम्बल हॉस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा का कहना है कि जो हॉस्टल पूरी तरह से गाइड लाइन की पालना नहीं कर रहे, उनके खिलाफ सख्ती की जाएगी। 50 फीसदी हॉस्टलों में एंटी सुसाइड डिवाइस लग सके, सभी हॉस्टल्स में लगवाना सुनिश्चित करेंगे।

प्रशासन आगे आए
कोटा हॉस्टल एसोसिएशन फाउंडर प्रेसीडेंट मनीष जैन का कहना है कि 85 फीसदी हॉस्टल तो बिना लाइसेंस के हैं। गाइड लाइन की पालना पंजीकृत छात्रावासों तक ही सीमित। प्रशासन को हॉस्टल और पीजी संचालित करने से पहले लाइसेंस लेने के लिए सख्ती करनी होगी तभी गाइड लाइन की पालना हो पाएगी।