
देह व्यापार
कोटा.मासूम बच्चियों को जिस्मफरोशी के दलदल में धकेलने वाले अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर कैथूनीपोल के तत्कालीन सीआई ने रिपोर्ट दर्ज करने तक से साफ इनकार कर दिया था। जिसके बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने कोटा पुलिस अधीक्षक को उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर जेल भेजने और जुर्माना वसूलने के आदेश दिए थे। उस आदेश को कोटा पुलिस के आला अफसर 9 महीने से दबाकर बैठे हैं।
बांग्लादेश से लड़कियों को भारत लाकर देहव्यापार कराने वाले सुल्तान मिर्जा और उसके गिरोह को कोटा पुलिस डेढ़ साल पहले ही दबोच सकती थी, लेकिन कैथूनीपोल के तत्कालीन सीआई प्रमोद शर्मा ने कार्रवाई करना तो दूर इस मामले में एफआईआर दर्ज करने तक से साफ इनकार कर दिया था। चार बार ईमेल और पत्रों के जरिए लिखित तहरीर भेजने पर भी कार्रवाई न किए जाने के बाद सीडब्ल्यूसी न्यायपीठ ने 23 जून 2017 को कैथूनीपोल सीआई को पत्र (संख्या 4029/17) भेजकर 'खुशी' की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए निर्देशित किया, लेकिन तत्कालीन सीआई प्रमोद शर्मा ने इसके जवाब में घटना बांग्लादेश में कारित होना बताकर, वहीं एफआईआर दर्ज कराने की बात लिखकर 23 अगस्त 2017 को पत्र वापस भेज दिया। सीडब्ल्यूसी की न्यायपीठ ने इसे बाल संरक्षण अधिनियम की धारा 21 का उल्लंघन मानते हुए एसपी को कैथूनीपोल सीआई के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के आदेश दिए।
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साथ ही लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण को बनाए गए अधिनियम 2012 के तहत दंडात्मक कार्रवाई करने के आदेश दिए, जिसमें अधिकतम छह महीने जेल और आर्थिक जुर्माना वसूलने का प्रावधान है, लेकिन 9 महीने बाद भी यह आदेश एसपी कार्यालय में धूल फांक रहे हैं।
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बांग्लादेशी लड़की के मामले में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने से लिखित इनकार करने पर न्यायपीठ ने 19 सितंबर 2017 को एसपी को तत्कालीन सीआई प्रमोद शर्मा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक की गई कार्रवाई के बाबत समिति को कोटा पुलिस ने कोई सूचना नहीं दी है।
-हरीश गुरुबख्शानी, चेयरमैन, बाल कल्याण समिति कोटा
Published on:
30 Jun 2018 04:25 pm
