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#JEE-Advanced : टॉपर्स बोले, कोटा ने बनाया हमारा भविष्य

गलती रिपीट न होने दें अमन बंसल : एआईआर-1 स्कोर- 320/372 जेईई एडवांस टॉपर अमन बंसल ने अपनी सफलता का सीक्रेट बताते हुए कहा कि ध्यान रखें किसी भी सब्जेक्ट में गलती रिपीट न हो। 17 साल की उम्र में ऑल इंडिया टॉप करने वाले अमन ने जेईई-मेन में भी 320 अंक का स्कोर अर्जित […]

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Shailendra Tiwari

Jun 12, 2016

गलती रिपीट न होने दें

अमन बंसल : एआईआर-1

स्कोर- 320/372

जेईई एडवांस टॉपर अमन बंसल ने अपनी सफलता का सीक्रेट बताते हुए कहा कि ध्यान रखें किसी भी सब्जेक्ट में गलती रिपीट न हो। 17 साल की उम्र में ऑल इंडिया टॉप करने वाले अमन ने जेईई-मेन में भी 320 अंक का स्कोर अर्जित किया है। वह बताते हैं कि टॉपर बनने के लिए उन्होंने अलग से कोई मेहनत नहीं की। क्लासरूम पढ़ाई के साथ-साथ ध्यान से सेल्फ स्टडी की और खुद पर भरोसा रखा। अमन ने कहा कि अब वह आईआईटी मुम्बई की कंप्यूटर साइंस ब्रांच में दाखिला लेना चाहते हैं। 12वीं बोर्ड परीक्षा 98 फीसद अंकों से पास करने वाले अमन ने केमिस्ट्री में 100 और मैथ्स में 99 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। अमन आईआईटी मुम्बई जोन के टॉपर भी हैं।

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टाइम मैनेजमेंट ने दिलाई सफलता

भावेश धींगरा

एआईआर-2

स्कोर- 312/372

जेईई एडवांस की परीक्षा में मैंने सबसे पहले केमिस्ट्री, फिर फिजिक्स और आखिर में मैथ्स के सवाल हल किए। जिससे मुझे टाइम मैनेजमेंट में आसानी रही और यही मेरी सफलता का राज है। दूसरी रैंक हासिल करने वाले यमुनानगर निवासी भावेश गुप्ता ने अपनी सफलता का मूल मंत्र साझा करते हुए कहा कि क्वेश्चन पर प्रेशर देने के बजाय कंसेप्ट को समझने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे एप्लीकेशन मजबूत हो जाती है। यदि आपका कंसेप्ट क्लियर होगा तो आप कम से कम समय में मनचाहे जितने क्वेश्चन हल कर सकेंगे। भावेश ने जेईई मेन में 285 अंक अर्जित करने के साथ ही 12वीं परीक्षा 92.4 प्रतिशत अंकों से पास की।

Read More : जेईई एडवांस : कोचिंग नगरी में बजे खुशियों के ढोल...सफलता पर झूमा कोटा


अपनी गलतियों को नजरअंदाज न करें

कुणाल गोयल

एआईआर- 3

स्कोर - 310/372

जेईई एडवांस में अखिल भारतीय स्तर पर तीसरी रैंक हासिल करने वाले जयपुर निवासी कुणाल गोयल ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज करने से उन्हें रिपीट करने की आदत पड़ जाती है। इसलिए जिन्हें आप सिली मिस्टेक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें पकड़ में आते ही तत्काल सुधारें। कुणाल ने बताया कि दो साल की तैयारी के दौरान सबसे पहले अपनी गलतियों को सुधारने का तरीका सीखा। यही वजह रही जो जेईई मेन के पेपर में गलतियां की थीं, उन्हें एडवांस में नहीं होने दिया। कुणाल भी आईआईटी मुम्बई से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना चाहते हैं।

कोटा ने दिखाया सफलता का रास्ता

रिया सिंह

रैंक - गल्र्स कैटेगरी टॉपर (एआईआर- 133)

स्कोर- 239/372

कोटा में रहकर दो साल तक कोचिंग करने वाली मध्यप्रदेश की सिंगौली निवासी रिया सिंह ने अपना सक्सेज मंत्रा बताते हुए कहा कि कोटा में पढ़ाई के दौरान मैंने परीक्षा के दबाव पर काबू पाना और खुद को रिलेक्स रखना सीखा। इसी का नतीजा है जो जेईई-एडवांस में गल्र्स कैटेगरी में टॉप कर सकी। रिया ने यह सफलता पहले ही प्रयास में हासिल की है और अब वह आईआईटी दिल्ली या कानपुर से पढ़ाई करना चाहती हैं। रिया कहती हैं कि पढ़ाई के मामले में कोटा का कोई जवाब नहीं। जरा सी उलझन होने पर सरल तरीके से अनुवाद करके चीजें समझाई जाती हैं। कोचिंग में पांच से छह घंटे की पढ़ाई करने के बावजूद करीब इतने ही घंटे सेल्फ स्टडी करने में खूब मन लगता है।

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कंपीटिशन के माहौल ने दिलाई सफलता

चिन्मय अवले

रैंक- एससी कैटेगरी टॉपर

स्कोर- 263/372

कोटा में कंपीटिशन का माहौल देखकर इतना तो समझ गया था कि मेरा सलेक्शन तय है, लेकिन दो साल के दौरान कोचिंग में शिक्षकों ने इतनी बारीकी से पढ़ाया कि एक एवरेज स्टूडेंट कैटेगरी टॉपर बन गया। जेईई एडवांस में एसी कैटेगरी टॉपर चिन्मय अवले अपनी सफलता का श्रेय कोटा के पढ़ाई के माहौल को देते हैं। वह कहते हैं कि छह से सात घंटे कोचिंग में पढऩे के बाद इतना ही वक्त सेल्फ स्टडी के लिए आसानी से मिल जाता। कोचिंग में कंपीटिशन का इतना शानदार माहौल है कि हर किसी को आगे बढऩे और अच्छा करने का मौका मिलता है। शिक्षकों की प्रॉपर गाइडेंस पढऩे की ललक को और बढ़ा देती है। चिन्मय आईआईटी मुम्बई से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना चाहते हैं।