
इस हाथ से उस हाथ बिकती रही बांग्लादेश की खुशी, साढ़े तीन साल तक जिस्मफरोशी के धंधे में धकेलते रहे तस्कर, कोटा ने कराया आजाद
कोटा. अन्तरराष्ट्रीय मानव तस्करों के चंगुल में फंसी बांग्लादेश की बेटी 'खुशी' चार साल बाद घर लौटेगी। बाल कल्याण समिति की डेढ़ साल की कोशिशों के बाद आखिरकार सीआईडीआईबी ने 'खुशी' का एग्जिट परमिट जारी कर दिया है।
समिति उसे 9 जुलाई को कोटा से पश्चिम बंगाल स्थित हरिदासपुर बॉर्डर पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की मौजूदगी में परिजनों को सौंपेंगे।
रोजी रोटी की तलाश में घर से निकली 14 साल की मासूम 'खुशी' 4 साल पहले जिस्मफरोशी का इंटरनेशनल रैकेट चलाने वाले सुल्तान मिर्जा गिरोह के चंगुल में फंस गई थी।
मिर्जा के गुर्गे उसे अवैध तरीके से बांग्लादेश की सीमा पार करवा कर भारत ले आए। जहां कोलकता से लेकर कोटा तक 8 बार बेचा गया। 19 अगस्त 2016 को किसी तरह यह लड़की गिरोह के चंगुल से भाग कर कोटा बैराज पहुंची। जहां से पुलिस ने इसे बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर नान्ता स्थित बालिका गृह भेजा था।
11 महीने बाद मिला घर
'खुशी' इतने गहरे सदमे में थी कि कई महीने तक किसी से कुछ नहीं बोली। उसकी हालत देखकर पशोपेश में पड़े सीडब्ल्यूसी के पदाधिकारियों को जब कुछ न सूझा तो उन्होंने उसकी बातचीत के ऑडियो बनाकर भाषा विशेषज्ञों के पास भिजवाए।
तब करीब 11 महीने बाद जाकर राज खुला कि परम्परागत बांग्ला भाषा बोल रही लड़की का नाम खुशी (काल्पनिक नाम) है। पता ठिकाना मालूम पडऩे के बाद सीडब्ल्यूसी ने 12 अप्रेल 2018 को बांग्लादेश के दूतावास को सारी जानकारी उपलब्ध करवाई।
दूतावास ने महज 18 दिनों में लड़की के परिजनों को तलाश कर उसकी जानकारी कोटा भेज दी। उसे वापस घर भेजने के लिए ट्रेवल परमिट भी जारी कर दिया।
ऐसे जारी हुआ परमिट
बांग्लादेश से ट्रेवल परमिट जारी होते ही सीडब्ल्यूसी खुशी को वापस घर भेजने के लिए उसका एग्जिट परमिट बनवाने में जुट गई। सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष हरीश गुरुबख्शानी ने भारतीय जांच एजेंसियों को उसके बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई।
इसके बाद लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया। अन्तरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों से हरी झंडी मिलने के बाद सीआईडीआईबी के जयपुर स्थित फॉरनर रीजनल रजिस्ट्रेशन अफेयर्स ऑफीसर (एफआरआरओ) ने 'खुशी' का एग्जिट परमिट जारी कर दिया।
चार साल बाद लौटेगी
'खुशी' चार साल बाद 9 जुलाई को अपने घर लौटेगी। सीडब्ल्यूसी टीम सुरक्षा के बीच उसे पश्चिम बंगाल स्थित हरिदासपुर बार्डर पर लेकर जाएगी। जहां दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों की मौजूदगी में उसे उसके परिजनों को सौंपा जाएगा।
हरीश गुरुबख्शानी, अध्यक्ष, सीडब्ल्यूसी कोटा
Published on:
01 Jul 2018 12:13 pm
