
कोटा .
मोखापाड़ा स्थित पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में सवाईमाधोपुर जिले के ऊंट (रेगिस्तान का जहाज) पालकों का तीन दिवसीय शिविर आयोजित किया जा रहा है। शिविर में दूसरे दिन राजस्थान पशुपालक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गोरधन रायका ने निरीक्षण किया। इस दौरान रायका ने कहा कि ऊंटनी के दूध को बढ़ावा देने, आमजन को सुगमता से यह दूध उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक संभाग मुख्यालय पर एक-एक बीएमसी (बल्क मिल्क कूलर) लगाई जाएगी, जहां पर संभाग के ऊंट पालक दूध बेच सकेंगे। उंटनी के दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। बच्चों को ये दूध पिलाने से उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। और आसानी से कोई बीमार नहीं होगा।
यह दूध आमजन को सरकार द्वारा निर्धारित दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। शेष दूध को आरसीडीएफ में भेजा जाएगा। संभाग मुख्यालयों में बीएमसी का संचालन सरस डेयरी करेंगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए सरकार से पांच करोड़ का बजट मांगा है। प्रयास रहेगा कि इसी जनवरी से कोटा में ऊंटनी का दूध मिलना शुरू हो जाएगा। इसके लिए बजट का प्रावधान किया गया है।
कई पहलुओं पर चर्चा
शिविर में प्रशिक्षण संस्थान के उपनिदेशक डॉ. अनिल शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान ऊंट पालकों से ऊंटों की उन्नति, विकास व आर्थिक उत्थान पर चर्चा हुई। राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड द्वारा संचालित भामाशाह बीमा योजना में ऊंटों का बीमा, राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत उष्ट्र विकास योजना, प्रत्येक जिले में सर्रा नियंत्रण पर चर्चा की गई। इस दौरान रेबारी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष मेघराज रायका, कोटा जिलाध्यक्ष गोविन्द खटाना, सदस्य शिवराज रेबारी, राजाराम बडाखेडा आदि मौजूद थे।
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कोटा मोखापाड़ा पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान उपनिदेशक डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि प्रशिक्षण शिविर में राजस्थान पशुपालक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष गोरधन रायका ने कोटा डेयरी से ऊंटनी का बेचने की बात तो कही थी। अब वही बता सकते हैं, कहां से दूध खरीदेंगे, बेचेंगे।
कोटा डेयरी एमडी श्याम बाबू वर्मा का कहना है कि हमारे पास ऊंट पालकों की समितियां ही नहीं हैं। अभी तक ऐसा प्रस्ताव भी नहीं लिया। और न ही आरसीडीएफ से ऐेसे कोई निर्देश मिले। बोर्ड अध्यक्ष गोरधन रायका ने कोटा डेयरी द्वारा दूध बेचने की बात कही तो उन्हें सरकार से कुछ संकेत मिले होंगे। हमें कोई सूचना नहीं है।
Updated on:
20 Dec 2017 06:20 pm
Published on:
20 Dec 2017 06:18 pm
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