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खुलासा: कोटा पुलिस की नजरों में एफएसएल नकारा

पिछले साल रेंज के 5 जिलों में मात्र 50 बार ही पुलिस ने किया उपयोग
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कोटा

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Zuber Khan

Jun 19, 2018

खुलासा: कोटा पुलिस की नजरों में एफएसएल नकारा

खुलासा: कोटा पुलिस की नजरों में एफएसएल नकारा

कोटा. हत्या का प्रयास, लूट, चोरी, नकबजनी, डकैती व अपहरण जैसे संगीन व सनसनीखेज मामलों में पुलिस की मदद के लिए तकनीकी विशेषज्ञों व वैज्ञानिक अनुसंधान करने वाली एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैब) की मोबाइल यूनिट हर जिले में है।

बावजूद इसके पुलिस उनकी मदद नहीं ले रही। पिछले साल रेंज के 5 जिलों में मात्र 50 बार ही एफएसएल की मोबाइल यूनिट टीम को पुलिस ने मौके पर बुलाया।

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गम्भीर मामलों की मौके पर जांच और नमूने लेने में पुलिस को होने वाली परेशानी को देखते हुए ही सरकार की ओर से हर जिले में एक-एक एफएसएल मोबाइल यूनिट शुरू की गई है। इससे पुलिस अधिकारी कोई भी घटना होने पर उन्हें सूचना देकर तुरंत मौके पर बुला सकते हैं।

वर्ष 2006 से ये यूनिटें जिलों में काम रही हैं, लेकिन पुलिस अधिकारी इनका उतना उपयोग नहीं कर रहे, जितना करना चाहिए। पुलिस मुख्यालय की ओर से जब इनके उपयोग पर जोर दिया और इसकी मॉनिटरिंग शुरू की तो हकीकत सामने आई।

यूनिट में तकनीकी विशेषज्ञ व संसाधन
कोटा में तो संभाग स्तर की फोरेंसिक साइंस लैब (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) भी है। एक वेन में संचालित मोबाइल यूनिट में एक से दो तकनीकी विशेषज्ञ, आवश्यक उपकरण व संसाधन होते हैं। सूचना मिलते ही ये मौके पर पहुंचकर रक्त के नमूने व फिंगर प्रिंट लेकर बारीकी से जांच कर पुलिस अनुसंधान में मदद करते हैं।

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पिछले साल 5 फीसदी मामलों में बुलाई
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हर जिले में कुल दर्ज अपराधों में से एक साल में करीब डेढ़ सौ से दो सौ गम्भीर व सनसनीखेज मामले होते हैं। गत वर्ष संभाग के 5 जिलों में मात्र 5 फीसदी मामलों में ही इनका उपयोग किया गया। संभाग में दर्ज करीब एक हजार गम्भीर मामलों में से मात्र 50 में ही इन यूनिटों को बुलाया गया, जबकि इस साल 31 मई तक 5 माह में रेंज में 38 बार इनका उपयोग किया गया है।

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सबसे ज्यादा बूंदी व सबसे कम कोटा ग्रामीण

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार रेंज में सबसे ज्यादा गम्भीर अपराध कोटा शहर में दर्ज होने व शहर में दूरी कम होने के बावजूद यहां भी इस यूनिट का पूरा उपयोग नहीं किया जा रहा। कोटा शहर में वर्ष 2017 में मात्र 6 बार और 2018 में 31 मई तक 8 बार ही यूनिट को बुलाया गया। जबकि कोटा ग्रामीण में 2017 में 4 व 2018 में 1 बार, बूंदी में 2017 में 26 व 2018 में 10 बार, बारां में 2017 में 8 व 2018 में 10 बार और झालावाड़ जैसे शहर में वर्ष 2017 में 6 और 2018 में 31 मई तक 9 बार ही यूनिट का उपयोग किया गया।