
ashok goyal
कोटा.हर साल बड़ी संख्या में प्रतिभाएं विदेश में जाकर वहां के उद्योग और विकास को आगे बढ़ा रही हैं। कोटा कलक्टर और 2006 बैच के आईएएस अधिकारी गौरव गोयल भी विदेश जाना चाहते थे। बीकॉम की पढ़ाई के बाद अमरीका के ख्यात विश्वविद्यालय में उनका प्रवेश हो गया। शुल्क की 80 प्रतिशत राशि स्कॉलरशिप में वापस मिल रही थी, लेकिन मां रंजना देवी ने कहा, विदेश मत जाओ। उनकी बात मान ली और फिर आईएएस का मानस बनाया। इसके बाद 21 साल की आयु में पहली बार में ही आईएएस के लिए चयन हुआ और में दसवीं रैंक आई।
पत्रिका से खास बातचीत में गोयल ने युवाओं को संदेश दिया।
पत्रिका : आप फुर्सत के पलों में क्या करते हैं
गोयल : सुबह खेल, योग का समय रहता है। पुस्तक पढऩा बहुत पसंद है, खासतौर से मोटिवेनशल, अध्यात्म और सफल लोगों की जीवनी पढ़ता हूं। सफर में संगीत और पुस्तकें पढऩे का शौक पूरा करता हूं। बॉस्केटबाल और लॉन टेनिस खेलता हूं। चार बार 21 किमी दौड़ में भाग ले चुका हूं।
पत्रिका : आपका सबसे मजबूत पक्ष क्या है
गोयल : किसी कार्य को करने और नया सीखने की इच्छाशक्ति।
पत्रिका : आप अपने जीवनसाथी से कैसे मिले
गोयल : मेरी अरेंज मैरिज हुई और पत्नी के परिवार को पहले से ही जानते थे, पत्नी श्वेता गोयल सीए हैं, लेकिन अभी घर ही संभाल रही हैं। मैं सीकर से हूं और श्वेता भी वहीं से है। दो बच्चे हैं।
पत्रिका : युवाओं के लिए संदेश
गोयल : सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। धैर्य के साथ मेहनत करनी चाहिए। कई बार सफलता देरी से मिलती है, लेकिन मेहनत बेकार नहीं जाती।
पत्रिका : कैरियर चुनने के समय का खास अनुभव क्या रहा
गोयल : जब मां की बात मानकर आईएएस की परीक्षा की तैयार कर रहा था तो कई बार असफल होने का डर सताता था, लेकिन सफल होने पर लगा मेरा निर्णय सही था।
पत्रिका : सबसे सुखद कब लगता है
गोयल : जब किसी जरूरतमंद को राहत मिलती है और किसी निर्णय से समस्याओं को समाधान मिलता है।
Published on:
02 Jul 2018 06:41 pm
