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राजस्थान के कोटा का यह बेटा दुनिया को सुनाएगा खुशखबरी

अमरीका के शिकागो की नार्थ वेस्टर्न यूर्निवसिटी में मूवमेंट डिस्आर्डर पर शोध कर रहे हैं पीपल्दा के डॉ. मुकेश गौतम  
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कोटा

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Rajesh Tripathi

May 14, 2019

kota news

राजस्थान के कोटा का यह बेटा दुनिया को सुनाएगा खुशखबरी

कोटा. धीरे-धीरे शरीर के अंगों के शिथिल होने जाने की खतरनाक और लाइलाज बीमारी एमायोट्रोफिक लेटरल स्क्लरोसिस जिसे मूवमेंट डिस्आर्डर भी कहा जाता है। इस बीमारी के उपचार की आने वाले कुछ वर्षों में अच्छी खबर आने वाली है और कोटा जिले का बेटा ही इस खबर को दुनिया को सुनाएगा। इस बीमारी का अभी तक दुनिया को ना तो कारण पता है और ना ही इसका कोई इलाज है। अमरीका के शिकागो शहर के नार्थ वेस्टर्न विश्व विद्यालय में पिछले कई सालों से इस बीमारी के कारणों और उपचार पर शोध चल रहा है। कोटा के पीपल्दा के पास रोन गांव निवासी डॉ. मुकेश गौतम इस शोध को कर रहे हैं। हाल में ही उन्हें इसके लिए 60 हजार डॉलर की फेलोशिप भी प्रदान की गई है।

ना कारण पता ना दवा का
इस बीमारी में शरीर के अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते हैं। किसी रोगी में फेफड़े, किसी में आंत, हाथ-पैर अथवा अन्य कोई अंग काम करना बंद कर देता है। बीमारी होने के बाद तीन से पांच साल में रोगी की मौत हो जाती है। मृत्यु से पहले रोगी की हालत बहुत खराब हो जाती है। बीमारी बढऩे पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में हर अंग के काम को करने के लिए मशीनें लगानी पड़ती हैं। अभी तक इस बीमारी का कारण पता नहीं चल सका है। इसलिए इस बीमारी की दवा भी नहीं बनी है।

यह हो चुका है शोध में

डॉॅ. मुकेश गौतम ने बताया कि शरीर में मौजूद न्यूरोन्स हमारी मांसपेशियों को नियंत्रित करते हैं। जब न्यूरोन्स बीमार होने लगते हैं तो मांसपेशियों पर मस्तिष्क का नियंत्रण समाप्त होने लगता है। दिमाग में स्थित मोटर कोर्टेक्स में मौजूद अपर मोटर न्यूरॉन पर अध्ययन चल रहा है। अध्ययन के दौरान ऐसी अनेक चीजें पहचानी गई हैं, जिनसे दवा बन सके। अब ऐसे मोलीक्यूल की तलाश की जा रही है, जो इस बीमारी को नियंत्रित कर सकें। डॉ. गौतम के अनुसार अब दूसरे चरण में वे कुछ दवाओं को प्रायोगिक तौर पर उपयोग करेंगे। उसके नतीजे आने के बाद ही शोध की दिशा तय होगी।