
कोटा. शहर में पुलिस भले ही मुख्य मार्गों पर गश्त का दावा करे, लेकिन कॉलोनियों की गलियों में कब्जा तो चोरों का ही है। शहर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद चोरों का दुस्साहस चरम पर है। चोरियों में कमी आने की जगह बढ़ोतरी होने लगी है। हर 8 घंटे में शहर के किसी न किसी इलाके में चोरी की घटना हो रही हैं। शहर वाहन चोर गिरोहों के लिए स्वर्ग साबित हो रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर में हर रोज औसतन दो दुपहिया व हर सप्ताह एक चौपहिया वाहन चोरी हो रहा है। पुलिस इन मामलों में दस फीसदी भी रिकवरी नहीं कर पा रही है।
गत वर्षों से 20 फीसदी ज्यादा चोरी
पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर नजर डाले तो इस वर्ष सितम्बर माह तक पिछले दो वर्षों से करीब 20 फीसदी ज्यादा वाहन चोरी हुए हैं।
...तो परिवाद दें
पुलिस के पास आने वाली हर शिकायत को दर्ज करना उनकी जिम्मेदारी है। एफआईआर दर्ज करने को लेकर उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और पुलिस महानिदेशालय की ओर से दिशा निर्देश जारी किए गए। इसके बाद भी पुलिस इन्हें नहीं मानती है। ऐसे में अगर थाने में शिकायत दर्ज नहीं हो तो पुलिस अधीक्षक को भी परिवाद दिया जा सकता है।
विवेक नंदवाना, एडवोकेट
हां बढ़ी हैं चोरियां
शहर में वाहन चोरी की वारदातों में पिछले कुछ दिनों से हालांकि थोड़ा इजाफा हुआ है। पुलिस चोरों को पकडऩे के लिए पूरे प्रयास कर रही है। जगह-जगह दबिश भी दी जा रही है। इसके अलावा अन्य अपराध के मामलों में कमी दर्ज की गई है। बरामदगी व चोरी की रोकथाम के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं।
दीपक भार्गव, पुलिस अधीक्षक, शहर, कोटा।
चोरी के आंकड़ों पर एक नजर
अवधि संख्या
जनवरी से सितम्बर 2016 781
जनवरी से सितम्बर 2017 868
जनवरी से सितम्बर 2018 887
दुपहिया वाहन
अवधि संख्या
जनवरी से सितम्बर 2016 541
जनवरी से सितम्बर 2017 542
नवरी से सितम्बर 2018 628
चौपहिया वाहन
अवधि संख्या
जनवरी से सितम्बर 2016 40
जनवरी से सितम्बर 2017 39
जनवरी से सितम्बर 2018 32
मेन रोड पर गश्त, गलियां सूनी
पुलिस गश्त औपचारिक मात्र है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में केवल मुख्य मार्ग पर ही गश्त होती है। गलियों में गश्त के अभाव से चोरों के वारे-न्यारे हैं। रात में चोर आसानी से सूने मकानों को निशाना बनाते हैं और माल लेकर चंपत हो जाते हैं।
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एफआईआर दर्ज कराने में छूटते पसीने
बढ़ती चोरियों से लोग खौफजदा है। लेकिन पुलिस चोरों को गिरफ्तार करने के बजाय मामला दर्ज करने में ही टालमटोल करती है। चोरी के मामलों में गुमशुदगी दर्ज कर पल्ला झाड़ लेती है। ऐसे में लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठ रहा है। लोग अब चोरी के मामलों में बरामदगी व चोरों की गिरफ्तारी की उम्मीद छोड़ थानों में भविष्य की परेशानियों से बचने के लिए एफआईआर करवाने पहुंच रहे है। थानों में जाने वाले पीडितों को ही पुलिसकर्मी मामला दर्ज करने की जगह इस्तगासे की नसीहत दे रहे हैं। पुलिस पीडितों को थानों की चौखट से ही लौटा देती है। पुलिसकर्मी खुद लोगों को न्यायालय की शरण में जाकर इस्तगासा की सलाह देती है। इसके चलते न्यायालय में इस्तगासों की संख्या बढऩे लगी है।
Published on:
13 Nov 2018 07:00 am
