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कोटा. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इन दिनों मुख्य ऑपरेशन थिएटर की बिजली खराब होने से डॉक्टरों को काफ ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सर्जन टॉर्च व इमरजेंसी लाइटें लगाकर ऑपरेशन कर रहे हैं। इससे व्यवस्था चरमराई हुई है। इमरजेंसी केस भी कई दिन से पेंडिंग चल रहे हैं। मरीज परेशान हैं।
अस्पताल में इमरजेंसी में तीन ओटी और प्रथम तल पर छह ओटी हैं। प्रथम तल के छह ओटी में से चार में पिछले आठ दिन से बिजली बंद है। सर्जन मरीजों के ऑपरेशन टॉर्च और इमरजेंसी लाइटों के भरोसे कर रहे हैं। पर्याप्त
रोशनी नहीं होने से कभी भी बड़ी चूक होने का खतरा हमेशा बना
रहता है। ज्यादा परेशानी गायनिक व पीडियाट्रिक ऑपरेशन में आ रही है। सभी विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने ऑटी की समस्याओं को लेकर अधीक्षक को लिखकर भी दे रखा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही।
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- ऑटोक्लेव मशीन भी खराब
सूत्रों ने बताया कि मुख्य ओटी में ऑपरेशन से पूर्व कपड़े और औजारों को स्टॅरिलाइजेशन (विसंक्रमित) करने वाली ऑटोक्लेव मशीन भी बंद है। इमरजेंसी ओटी में स्टॅरिलाइजेशन के लिए जाना पड़ता है। इससे फि जूल की देरी होने के साथ ही संक्रमण का खतरा भी रहता है।
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- सक्शन मशीन भी खराब
सूत्रों के अनुसार ओटी में सक्शन मशीन भी खराब है। सक्शन मशीन ऑपरेशन के दौरान चीरफ ाड़ से बहने वाले वेस्ट ब्लड एवं फ्लूड को सोखने के काम आती है। इसके खराब होने से मरीज का ब्लड बहता रहता है। ऐसे में संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। जबकि एमबीएस अस्पताल से दो नई मशीन आई हैं। उसी से काम चलाया जा रहा है।
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बदहाली ऐसी भी
स्पॉट पोर्टेबल लाइट: मुख्य ओटी में तीन र्पोटेबल लाइटें हैं, ये भी छह माह से बंद हैं। सर्जन को ऑपरेशन में काफ ी परेशानी होती है।
कोटरी मशीन: ऑपरेशन के दौरान शरीर के अंदर चीर-फ ाड़ के काम आने वाली 7 में से दो कोटरी मशीन भी बंद हैं। अस्पताल में कई बार तो इसे लेकर खींचतान हो जाती है।
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वर्जन....
- गायनिक, प्लास्टिक, पीडियाट्रिक विभाग खोल दिए हैं, लेकिन उनके पास ऑपरेशन करने के औजार ही नहीं हैं। सर्जरी विभाग के उपकरणों से उनका काम चल रहा। परेशानी आ रही है। सभी विभागों के पास अपने उपकरण होना चाहिए। अस्पताल में प्रतिदिन 25 से 30 ऑपरेशन होते हैं।
- डॉ. एस.सी. दुलारा, एचओडी, ऑपरेशन थियेटर
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- ऑपरेशन थियेटर में बंद लाइटों व मशीनों को जल्द ठीक करवाएंंगे।
- डॉ. देवेन्द्र विजयवर्गीय, अधीक्षक, नया अस्पताल
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- ऑपरेशन थियेटरों में लाइटें बंद होने की जानकारी मिली है। अधीक्षक को इसके लिए निर्देशित कर दिया है। जल्द लाइटें ठीक करवाई जाएंगी। जो उपकरण खराब पड़े या नहीं हैं, उनके लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। उन्हें 23 अगस्त को आरएमआरएस की बैठक में रखेंगे।
- डॉ. गिरीश वर्मा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
टॉर्च व इमरजेंसी लाइट में हो रहे ऑपरेशन
- छह में से चार ओटी में आठ दिन से बंद बिजली - ऊपर-नीचे ओटी वाले उपकरण मांगकर चला रहे काम
कोटा. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इन दिनों मुख्य ऑपरेशन थिएटर की बिजली खराब होने से डॉक्टरों को काफ ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सर्जन टॉर्च व इमरजेंसी लाइटें लगाकर ऑपरेशन कर रहे हैं। इससे व्यवस्था चरमराई हुई है। इमरजेंसी केस भी कई दिन से पेंडिंग चल रहे हैं। मरीज परेशान हैं।
अस्पताल में इमरजेंसी में तीन ओटी और प्रथम तल पर छह ओटी हैं। प्रथम तल के छह ओटी में से चार में पिछले आठ दिन से बिजली बंद है। सर्जन मरीजों के ऑपरेशन टॉर्च और इमरजेंसी लाइटों के भरोसे कर रहे हैं। पर्याप्त
रोशनी नहीं होने से कभी भी बड़ी चूक होने का खतरा हमेशा बना
रहता है। ज्यादा परेशानी गायनिक व पीडियाट्रिक ऑपरेशन में आ रही है। सभी विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने ऑटी की समस्याओं को लेकर अधीक्षक को लिखकर भी दे रखा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही।
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- ऑटोक्लेव मशीन भी खराब
सूत्रों ने बताया कि मुख्य ओटी में ऑपरेशन से पूर्व कपड़े और औजारों को स्टॅरिलाइजेशन (विसंक्रमित) करने वाली ऑटोक्लेव मशीन भी बंद है। इमरजेंसी ओटी में स्टॅरिलाइजेशन के लिए जाना पड़ता है। इससे फि जूल की देरी होने के साथ ही संक्रमण का खतरा भी रहता है।
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- सक्शन मशीन भी खराब
सूत्रों के अनुसार ओटी में सक्शन मशीन भी खराब है। सक्शन मशीन ऑपरेशन के दौरान चीरफ ाड़ से बहने वाले वेस्ट ब्लड एवं फ्लूड को सोखने के काम आती है। इसके खराब होने से मरीज का ब्लड बहता रहता है। ऐसे में संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। जबकि एमबीएस अस्पताल से दो नई मशीन आई हैं। उसी से काम चलाया जा रहा है।
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बदहाली ऐसी भी
स्पॉट पोर्टेबल लाइट: मुख्य ओटी में तीन र्पोटेबल लाइटें हैं, ये भी छह माह से बंद हैं। सर्जन को ऑपरेशन में काफ ी परेशानी होती है।
कोटरी मशीन: ऑपरेशन के दौरान शरीर के अंदर चीर-फ ाड़ के काम आने वाली 7 में से दो कोटरी मशीन भी बंद हैं। अस्पताल में कई बार तो इसे लेकर खींचतान हो जाती है।
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वर्जन....
- गायनिक, प्लास्टिक, पीडियाट्रिक विभाग खोल दिए हैं, लेकिन उनके पास ऑपरेशन करने के औजार ही नहीं हैं। सर्जरी विभाग के उपकरणों से उनका काम चल रहा। परेशानी आ रही है। सभी विभागों के पास अपने उपकरण होना चाहिए। अस्पताल में प्रतिदिन 25 से 30 ऑपरेशन होते हैं।
- डॉ. एस.सी. दुलारा, एचओडी, ऑपरेशन थियेटर
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- ऑपरेशन थियेटर में बंद लाइटों व मशीनों को जल्द ठीक करवाएंंगे।
- डॉ. देवेन्द्र विजयवर्गीय, अधीक्षक, नया अस्पताल
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- ऑपरेशन थियेटरों में लाइटें बंद होने की जानकारी मिली है। अधीक्षक को इसके लिए निर्देशित कर दिया है। जल्द लाइटें ठीक करवाई जाएंगी। जो उपकरण खराब पड़े या नहीं हैं, उनके लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। उन्हें 23 अगस्त को आरएमआरएस की बैठक में रखेंगे।
- डॉ. गिरीश वर्मा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
Published on:
11 Aug 2018 09:00 am
