
कोटा के 4 गांवों में मतदान का बहिष्कार, भाजपा-कांग्रेस पदाधिकारियों ने जोड़े ग्रामीणों के हाथ, पढि़ए क्या-क्या किए वादे...
मण्डाना. रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के मन्दिरगढ़ मतदान केन्द्र पर होने वाले मतदान का चार गांवों के मतदाताओं ने बहिष्कार कर दिया। करीब साढ़े बारह बजे तक10-15 मत ही डल पाए। मन्दिरगढ़, केशोपुरा, दामोदरपुरा व नयागांव के लोगों ने बिजली-सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से मतदान का बहिष्कार कर दिया। सूचना पाकर दोनों ही दलों के समर्थक मतदाताओं को मनाने मन्दिरगढ़ पहुंचे। आश्वासन दिया कि मतदान के बाद समस्याओं का समाधान किया जाएगा, वोट डालने का अधिकार न गवाएं।
पूर्व मंत्री मदन दिलावर पहुंचे, लाडपुरा के पूर्व प्रधान मन्नालाल गुर्जर, पूर्व प्रधान कान्ती गुर्जर, पूर्व कांग्रेस देहात जिला उपाध्यक्ष रामस्वरूप मीणा भी मन्दिरगढ़ पहुंचे तथा समझाइश की। काफी समझाने के बाद ग्रामीण मताधिकर का उपयोग करने को राजी हुए, दोपहर साढ़े बारह बजे मत डालना शुरू किया। फिर यहां केन्द्र पर मतदाताओं की लम्बी कतारें लग गई। इस केन्द्र पर 744 मतदाता हैं जिनमें से 524 ने मत डाले।
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झोटोली में 677 में से डले सिर्फ 12 वोट
सुल्तानपुर. झोटोली गांव में दोपहर साढ़े 12 बजे तक मात्र एक ही वोट डाला गया। पोलिंग पार्टियां खाली बैठी रही। मौके पर प्रशासन ग्रामीणों से मतदान के लिए समझाइश की। ग्रामीण टेल क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर मतदान बहिष्कार पर अड़े थे। कई दौर की समझाइश के बाद भी यहां शाम तक सिर्फ 12 वोट ही प्रशासन डलवा पाया। गांव में कुल 677 मतदाता हैं।
कोलीपुरा में पांच घंटे बाद प्रारम्भ हुआ मतदान
रावतभाटा. रामगंजमंडी विधान सभा क्षेत्र के कोलीपुरा गांव स्थित मतदान केन्द्र क्रमांक 45 पर दोपहर एक बजे तक एक भी मतदाता वोट डालने नहीं पहुंचा। 221 मतदाताओं के इस गांव में पांच घंटे तक मतदान केन्द्र पर एक भी मतदाता नहीं पहुंचने से मतदानकर्मी भी हैरत में दिखाई दिए। शून्य वोटिंग की सूचना मिलने पर सेक्टर मजिस्ट्रेट ने मौके पर पहुंच कर स्थिति की जानकारी ली। करीब सवा एक बजे बोरावास से पहुंचे वरिष्ठ ग्रामीणों की समझाइश के बाद मतदान प्रक्रिया शुरू हो सकी और 221 ग्रामीण मतदाताओं के गांव से 91 पुरुष तथा 76 महिलाओं समेत 167 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
विकास न होने से रोष
ग्रामीणों ने बताया कि कोलीपुरा गांव को बसाए करीब सौ वर्ष से अधिक समय हो चुका लेकिन वन क्षेत्र में आने से यहां बिजली पानी जैसी मूलभूल व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हो सकी। पिछले 10 से 15 वर्ष से हर बार जनप्रतिनिधि इन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर वोट ले जाते हैं। चुनाव के बाद यहां कोई झांकने भी नहीं आता।
Updated on:
08 Dec 2018 12:50 am
Published on:
08 Dec 2018 12:50 am
