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तब इस दिग्गज नेता ने अपने गुरू की बात न मानकर लड़ा था चुनाव…फिर जो हुआ वो

शायद इसकी शुरुआत 2003 में तब हुई जब भाया ने कांग्रेस से बगावत कर बारां से निर्दलीय चुनाव लड़ा था।
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कोटा

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Deepak Sharma

Nov 24, 2018

kota news

तब इस दिग्गज नेता ने अपने गुरू की बात न मानकर लड़ा था चुनाव...फिर जो हुआ वो

कोटा डिजिटल डेस्क. राजनीति में गुरू कब गुड़ और चेला चीनी हो जाए ये किसे पता। ऐसा ही एक किस्सा हाड़ौती की राजनीति में भी बड़ा मशहूर हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता शांति धारीवाल और पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया का रिश्ता गुरू और चेले का है। भाया तो कई बार मंचो से यह बात कह भी चुके हैं लेकिन पिछले कई वर्षो से दोनों के रिश्ते में कड़वाहट देखेने को मिली हैं। शायद इसकी शुरुआत 2003 में तब हुई जब भाया ने कांग्रेस से बगावत कर बारां से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। दरअसल प्रमोद जैन बारां से टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने उनकी जगह मदन महाराजा को टिकट दे दिया था। भाया ने इससे नाराज होकर अपना नामांकन दाखिल कर दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाया को मनाने की जिम्मेदारी उनके गुरू शांति धारीवाल को ही सौंपी थी लेकिन भाया उन्हें अनसुना कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था और भाजपा और कांग्रेस दोनों को हराकर जीत हासिल की थी। इसके बाद कांग्रेस से भाया को निष्कासित कर दिया गया और गुरू-चेले के रिश्ते में कड़वाहट आ गई। जब उनसे बगावत करने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मेरे लिए गुरू बाद में और जनता पहले है।

निर्दलीय चुनाव जीतने से न केवल भाया का कद बड़ा बल्कि आगामी चुनावों में कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में शामिल कर मंत्री भी बनाया। मौजूदा चुनावों में भाया अंता विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में है।