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कोटा की इस जेल में अजीब प्रेशर, निवृत्त होने के लिए होते हैं झगड़े, कभी भी हो सकती है बड़ी घटना

स्वच्छ भारत मिशन में भले ही केन्द्र सरकार पैसे देकर घर-घर में शौचालय बनवा रही है, लेकिन रामजंगजमंडी जेल में बंद कैदियों को इस मिशन से कोई लाभ नहीं है।
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कोटा की इस जेल में अजीब प्रेशर, निवृत्त होने के लिए होते हैं झगड़े, कभी भी हो सकती है बड़ी घटना

कोटा/ रामगंजमंडी.

स्वच्छ भारत मिशन में भले ही केन्द्र सरकार पैसे देकर घर-घर में शौचालय बनवा रही है, लेकिन रामजंगजमंडी जेल में बंद कैदियों को इस मिशन से कोई लाभ नहीं है। यहां तो रोज सुबह नित्यकर्म से निवृत्त होने तक में बंदियों के बीच झगड़े होते हैं। वजह है, जेल में पर्याप्त टॉयलेट न होना। जी हां! यहां 91 कैदियों के लिए बने हैं केवल 6 टॉयलेट्स। इस विकट प्रेशर के चलते यहां रोज बंदियों में झगड़े होते हैं।
दरअसल, यहां बंदी तो क्षमता से अधिक हैं लेकिन नित्यकर्म से निवृत्त होने के लिए भी पर्याप्त सुविधा नहीं है। पहले निवृत्त होने के चक्कर में आए दिन बंदियों में कहासुनी होती है। आवश्यक 'सुविधाओंÓ की कमी के चलते कभी भी कोई घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता। उपकारागृह की सारी व्यवस्था एक हैड कांस्टेबल के जिम्मे है। कोई जेलर नियुक्त नहीं है।

क्षमता से ज्यादा, झगड़े का कारण
40 कैदियों की क्षमता वाले उपकारागृह में अधिकांशत: क्षमता से दो गुना से अधिक कैदी रहते हैं। वर्तमान में 91 कैदी हैं। उपकारागार में छह सुविधाघर हैं। क्षमता से ज्यादा कैदी होने व सुविधाघर कम होने से नित्यकर्म के लिए नंबर के चक्कर में कैदियों में आए दिन कहासुनी होती है। प्रहरी को सुलह करानी पड़ती है। जो आदतन अपराधी हैं, वे अक्सर जेल में पहुंचने पर झगड़ते हैं।
पांच साल से हैड कांस्टेबल के भरोसे
पांच साल से जेलर का पद रिक्त है। हैड कांस्टेबल को जिम्मेदारी दे रखी है। प्रहरी के 11 में से सात पद रिक्त हैं। 4 बोर्डर होमगार्ड व दो स्थानीय होमगार्ड तैनात हैं। हैड कांस्टेबल का एक पद अरसे से रिक्त है।
प्रतिदिन बताते हंैं हालात
रामगंजमंडी उपकारागृह में बंद कैदियों की प्रतिदिन की संख्या से कोटा जेल अधीक्षक को अवगत कराया जाता है। अधिकारियों की नजर में सारा मामला है। इसके बावजूद सुधार की कोई पहल नहीं हुई।
भूमि मिली न हुआ विस्तार
बढ़ती कैदियों की संख्या को देखते हुए उपकारागृह के लिए भूमि आवंटन संबंधी मांग उठी थी। अधिकारियों की तरफ से निमाणा रोड पर भूमि चिन्हित करने की बातें भी हुई लेकिन राजस्व विभाग की तरफ से भूमि का आवंटन नहीं हुआ। उपकारागृह के पिछवाड़े सरकारी भूमि है जिसका उपयोग विस्तार के लिए किया जा सकता है लेकिन इस बारे में अब तक कोई योजना नहीं बनी।

करेंगे निरीक्षण
मामले में रामगंजमंडी उपखंड अधिकारी कृष्णगोपाल जोजन का कहना है कि आवश्यक सुविधाओं की कमी व नित्यकर्म के लिए कैदियों में कहासुनी की कोई जानकारी नहीं है। जल्द ही निरीक्षण कर व्यवस्था में सुधार के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराएंगे।