
कोटा. दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर गंगापुर सिटी-मथुरा रेलखंड में 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के बड़े स्थाई प्रतिबंध को खत्म करने के लिए इस बार वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 3 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पिछले साल भी 3 करोड़ मिले थे। मिशन रफ्तार के तहत इस योजना पर करीब 7 करोड़ 89 लाख 70 हजार रुपए खर्च किए जाएंगे। कई सालों से यह कार्य लंबित है। पर्याप्त राशि नहीं मिलने के कारण किलोमीटर संख्या 1093/1 से 1093/27 तक की लोकेशन से रफ्तार बाधा को दूर नहीं किया सका है। अब यह कार्य तेजी से होने की उम्मीद है। ट्रेनों की रफ्तार में इजाफा करने के लिए रेलवे ने मिशन रफ्तार प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट में वाया कोटा होकर दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग भी शामिल है। इसके तहत घुमाव दुरुस्त करने, ट्रेक में सुधार करने और फेसिंग करने जैसे कार्य शामिल हैं। इस मार्ग पर भविष्य में 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाने की योजना पर कार्य चल रहा है। 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन का परीक्षण इस मार्ग पर सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
मिशन रफ्तार योजना के तहत दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर ट्रेनों की गति बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है। यह काम आसान नहीं है। इसलिए इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए पटिरयों की क्षमता बढ़ाने, घुमावदार मोड़ का दुरुस्त करने, सिग्नलिंग सिस्टम पर काम करने जैसी योजनाएं शामिल।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार वाया कोटा होकर दिल्ली से मुंबई के बीच सफर के समय को 4 घंटे कम करने के अलावा ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से की जाएगी।
फेसिंग के लिए 28 करोड़ मिले
पश्चिम मध्य रेलवे को ट्रेक की तारबंदी के लिए 28 करोड़ 94 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि से स्टेशनों के पहुंच वाले ट्रेक की तारबंदी की जा सकेगी, जिसके हादसा होने की संभावना खत्म हो जाएगी।
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तकनीकी कारणों से भी विलंब हो रही ट्रेन
ट्रेनों के देरी से संचालन के सवाल पर शुक्रवार का राज्यसभा में दी गई जानकारी में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लिखित जवाब में बताया कि भारतीय रेलवे में विलंब होने का कारण अक्सर रेल इंजन संबंधी उपकरणों का खराब होना, बिजली केबल, रेलपथ, सिग्नल, यांत्रिक खराबी जैसे कई कारण हैं। इसके अलावा रेलवे लाइन पर लोडहोने के साथ-साथ बाहरी कारण भी ट्रेनें के विलम्ब से संचालन के जिम्मेदार है। इनमें विद्युत ग्रिड फेल होना, जन आंदोलन, प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियां शामिल हैं। इन पर रेलवे का नियंत्रण नहीं है।
रेलवे ने ये कदम भी उठाए
रेल मंत्री ने अवगत कराया है कि समय पालन संबंधी मामलों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें योजनाबद्ध तरीके से गाडिय़ों के अनुरक्षण समय को कम करने सहित अवसंरचना संबंधी विसंगतियों को दूर करना प्रमुख है। इसके अलावा एकीकृत मेगा ब्लॉक को इस प्रकार से नियोजित किया गया है कि सभी परिसंपत्तियों का रख रखाव एक साथ हो सके। डीजल इंजनों का बिजली के इंजनों से बदलने के कारण होने देरी से बचने के लिए कुछ गाडिय़ों को शुरू से अंत तक डीजल रेल इंजनों से चलाया जा रहा है। मेल, एक्ससप्रेस गाडिय़ों के पारंपरिक रेक को एलएचबी में बदला जा रहा है। इनके अलावा पिट लाइन परीक्षण समय और अनुरक्षण समय में कटौती करने की संभावना का भी अध्ययन किया जा रहा है।
Published on:
07 Feb 2020 08:32 pm
