
कोटा बैराज (फोटो-पत्रिका)
कोटा। राजस्थान और मध्यप्रदेश के किसानों की लाइफ लाइन कहे जाने वाले चंबल के तीनों प्रमुख बांधों के उन्नयन और सुधार के कार्य होंगे। कोटा बैराज के सभी गेट बदले जाएंगे। नए गेटों से बैराज की लाइफ करीब 50 साल बढ़ जाएगी। कोटा बैराज से निकलने वाली चंबल की नहरों से राजस्थान और मध्यप्रदेश के किसानों की 5 लाख हैक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होती है। बिजली उत्पादन और पेयजल का भी यह बांध प्रमुख स्रोत है।
चम्बल नदी के बांधों के उन्नयन की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राणा प्रताप सागर बांध, जवाहर सागर बांध और कोटा बैराज के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 225 करोड़ रुपए की लागत से कार्य कराए जाएंगे। बांधों के पुनर्वास और सुरक्षा सुधार के लिए यह कार्य डैम रिहैबिलिटेशन एंड इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप फेज-2) के तहत होंगे। इनके लिए निविदा जारी कर दी गई है। इससे क्षेत्र में जल प्रबंधन, सिंचाई और विद्युत उत्पादन को अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
वर्ष 1960 में कोटा बैराज के निर्माण के बाद से हाइड्रो-मैकेनिकल कार्यो में कोई बड़ा रिप्लेसमेंट/ओवरहालिंग कार्य नहीं हुआ। इसके 19 रेडियल गेट और 2 स्लूज गेट की स्थिति ठीक नहीं है। स्लूज गेट कई वर्षों से निष्क्रिय हैं। अब इस प्रोजेक्ट के तहत 19 रेडियल गेटों, 2 स्लूज गेटों, 2 सैट स्टॉपलोग गेट, गैन्ट्री क्रेन और विद्युत उपकरणों को बदलने का कार्य करते हुए व्यापक आधुनिकीकरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कोटा और बूंदी जिलों की पेयजल और सिंचाई आवश्यकताओं को देखते हुए सुधार कार्यों के दौरान भी बैराज का जल स्तर 854.50 फीट पर बना रहेगा। सभी कार्य पूर्ण जल भराव की स्थिति में ही होंगे।
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने बताया कि राणा प्रताप सागर बांध, चम्बल परियोजना का प्रमुख जल भंडारण केन्द्र है। यह बांध पेयजल और सिंचाई के लिए जल उपलब्धता के साथ-साथ 172 मेगावाट की विद्युत उत्पादन क्षमता रखता है। इसके राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए रखरखाव और उन्नयन कार्य कराए जा रहे हैं। बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति को बिना बाधित किए इस बांध के 17 वर्टिकल क्रेस्ट गेटों, गेन्ट्री क्रेन, 4 स्लूज गेटों, स्टॉपलोग गेटों को बदलने का कार्य और स्काई-जंप बकेट की मरम्मत का कार्य किया जाएगा। ये वर्टिकल गेट 18408 क्यूमेक्स तक की बाढ़ निकासी क्षमता रखते हैं।
राणा प्रताप सागर बांध के नीचे (डाउन स्ट्रीम में) स्थित जवाहर सागर बांध वर्ष 1972 में बना था। लगभग 33.66 मीटर ऊंचे बांध की सुरक्षा और 99 मेगावाट क्षमता वाले पावर हाउस की दक्षता बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास और तकनीकी सुधार किए जाएंगे। यह संरचना चंबल नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने और डाउन स्ट्रीम जल प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है।
बांध में 15.24 मीटर चौड़ाई एवं 13.41 मीटर ऊंचाई के 12 रेडियल गेट हैं। इसकी भराव क्षमता 67.11 एमसीयूएम है। परियोजना के सभी कार्य उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और समयबद्ध पूर्ण किए जाएंगे। तीनों बांधों के उन्नयन से जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ उनकी आयु में भी वृद्धि होगी।
'इस प्रोजेक्ट में कोटा बैराज के सभी गेट नए लगाए जाएंगे। यह गेट इस तरह के मेटल से बनेंगे, जिससे बैराज की लाइफ करीब 50 साल बढ़ जाएगी।' -सुनील गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग, कोटा
Updated on:
28 Apr 2026 10:17 pm
Published on:
28 Apr 2026 06:00 am
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