
kota stone
कोटा. हाड़ौती की अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले कोटा स्टोन उद्योग में पत्थर चिराई से निकलने वाली स्लरी अब इस उद्योग का रंग बदलेगी। वर्षों से पत्थर उद्यमियों के लिए मुसीबतों का पहाड़ बनी स्लरी मरते उद्योग के लिए संजीवनी का काम करेगी।
कोटा स्टोन की स्लरी स्टार्टअप प्लांट 16 जून को इन्द्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में शुरू होगा। उद्घाटन 16 जून को शाम 5बजे जिला कलक्टर रोहित गुप्ता करेंगे। संचालन पाषाण वेलफेयर फाण्डेशन कोटा की ओर से किया जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन में कोटा स्टोन वेस्ट मैनेजमेंट के तहत स्लरी का यह 53 लाख रुपए की लागत वाला प्लांट शुरू हो रहा है। इसमें राज्य सरकार 13.80 लाख रुपए का ग्राण्ट देगी। पहली किस्त के रूप में 1.27 लाख रुपए का चेक मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों पाषाण वेलफेयर फाउण्डेशन को सौंप दिया। फाउण्डेशन के कार्यकारी निदेशक मुकेश त्यागी ने बताया कि यह इन्द्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में संचालित डम्पिंग यार्ड में शुरू होगा। रीको ने जमीन नि:शुल्क उपलब्ध करवाई है।
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यह बनेंगे उत्पाद
प्रथम चरण में स्लरी से फ्लाई एेश की तरह इंटरलॉकिंग, पेवर ब्लॉक, दीवारों पर लगाई जाने वाली टाइल्स तैयार की जाएंगी। रैम्प की टाइल्स भी तैयार होंगी। दूसरे चरण में ब्लॉक बनाए जाएंगे। तैयार उत्पादों को सरकारी प्रोजेक्ट में काम में लेने का प्रस्ताव भेज दिया गया है।
सख्ती ने दिखाई राह
तीन-चार साल पहले कोटा स्टोन इकाइयों से निकलने वाली स्लरी का रोड नम्बर पांच व सात का डम्पिंग यार्ड पूरी तरह भर गया था। उद्यमी स्लरी को औद्योगिक क्षेत्र व आवासीय कॉलोनियों में सड़कों के किनारे, खाली भूखण्डों पर खाली कर करने लगे थे। प्रदूषण के बढ़ते खतरे के चलते मसला एनजीटी में चला गया। एनजीटी ने सख्ती बरतते हुए स्लरी का उचित निस्तारण नहीं करने तथा सड़कों पर फैलने पर एक दर्जन से अधिक पत्थर इकाइयों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया था। इसमें रीको, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और नगर विकास न्यास को भी पार्टी बनाया गया था। एनजीटी की सख्ती के बाद स्लरी मैनेजमेंट की दिशा में काम शुरू हुआ। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल ने आईआईटी रूड़की से स्लरी के उपयोग के बारे में अनुसंधान करवाया। इसके बाद यह स्टार्ट अप की दिशा में काम शुरू हुआ। इस स्टार्टअप की प्रधानमंत्री ने भी सराहना की है।
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आगे क्या
स्लरी आधारित प्लांट कोटा के बाद रामगंजमंडी, झालरापाटन में लगाया जाना प्रस्तावित है। यहां कोटा स्टोन सबसे ज्यादा निकाला जाता है। ज्यादातर कोटा स्टोन की खानें रामगंजमंडी क्षेत्र में है।
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Published on:
15 Jun 2018 04:07 pm
