
कोटा . शहर में अग्निशमन यंत्रों के बिना ही अस्पतालों को चलाया जा रहा है। कई अस्पतालों ने केवल छोटे आग बुझाने के यंत्र लगाकर खानापूर्ति कर रखी है। सरकारी अस्पतालों में भी यही हाल हैं। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस, जेके लोन व रामपुरा में अग्निशमन यंत्र मात्र दिखावे के लिए हैं। सरकारी अस्पतालों ने तो अग्निशमन विभाग से एनओसी तक नहीं ले रखी। गौरतलब है कि जेके लोन चिकित्सालय में एक बार आग लग भी चुकी है।
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आपातकालीन खिड़की तक नहीं
एमबीएस, जेके लोन, न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल व रामपुरा जिला अस्पताल के कई वार्ड में आपातकालीन खिड़की तक नहीं है। यहां जरूरत के 10 प्रतिशत संसाधन भी नहीं हैं। कई वार्डों में तो अग्निशमन यंत्र ही नहीं लगा रखे हैं। न ही इन्हें चलाने का प्रशिक्षण कर्मचारियों को दिया गया है।
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होना यह चाहिए
अग्निशमन गाइडलाइन के मुताबिक सभी अस्पतालों में बड़ा पानी का टैंक, और इससे सभी वार्डों में सप्लाई, ताकि हादसे से तत्काल निपटा जा सके। इसके अलावा पम्प, हीट रीडर, स्मोक रीडर, मोड्यूलर फायर उपकरण, साथ ही हाइरेंट सिस्टम, राइजर, होज लाइन, होजरील, होज टेबल (छोटे अग्निशमन यंत्र ) कार्बन डाइआक्साइड सिलेण्डर आदि के पुख्ता इंतजाम होने चाहिएं।
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कई नोटिस दिए, ध्यान नहीं देते
अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अग्निशमन यंत्र नहीं होना बड़े हादसे को निमंत्रण देना है। अस्पतालों के स्टाफ ने आग बुझाने का प्रशिक्षण भी नहीं लिया है। हम कई बार इन्हें नोटिस दे चुके हैं, लेकिन सरकारी तंत्र होने से कोई ध्यान नहीं देता।
Published on:
30 Apr 2018 01:15 pm
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