
कोटा . पुष्टिमार्ग के प्रथम निधि स्वरूप बड़े मथुराधीश मंदिर को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। इसके लिए मंदिर का विस्तार किया जाएगा। इसमें पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं मुहैया करवाई जाएगी। योजना पर जल्द कार्य करवाया जाएगा। शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ के गोस्वामी मिलन बावा ने मंगलवार को यह बात कही।
उन्होंने कहा कि मथुराधीश जी के मंदिर के पास निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इसमें भक्तों के ठहरने के लिए धर्मशाला का निर्माण किया जाएगा। विभिन्न आयोजनों के लिए ऑडिटोरियम भी बनवाया जाएगा। समय समय पर बड़े मनोरथ व विशेष कार्यक्रम होंगे। वैष्णवजनों को इनसे जोड़ा जाएगा।
पूर्व सरकार के द्वारा 2 करोड रूपए की राशि दी गई थी। सरकार इस राशि से मंदिर के बाहर बाजार का सौंदर्यकरण कराना चाहती थी। उन्होंने कहा कि हमारे पास पर्याप्त बजट है और मंदिर के नवनिर्माण और विस्तार कार्य कराने के बाद आवश्यकता होने पर इस राशि पर विचार किया जाएगा। गौ संरक्षण के लिए गायों को गोद लेने को लेकर भी भविष्य में प्रोजेक्ट बनाया जाएगा।
धार्मिक कॉरिडोर बनाएंगे
मिलन बावा ने कहा कि ९ निधियों को जोड़कर धार्मिक कॉरिडोर का निर्माण कर श्री मथुराधीश पीठ को श्रीनाथद्वारा और बृज से जोड़ा जाएगा। अधिकतर अभी श्रद्धालु नाथद्वारा में श्रीनाथजी के दर्शन कर बृज चले जाते हैं। उन श्रद्धालुओं को सुविधाएं मुहैया करवाकर कोटा आने के लिए प्रेरित किया जाएगा,वहीं बृज व नाथद्वारा में भी धर्मशाला व ऑडिटोरियम का निर्माण करवाया जाएगा। मिलन बावा मथुराधीश मंदिर में चल रहे पुष्टि महोत्सव और लालन कृष्णास्य बावा के उपनयन संस्कार के लिए कोटा आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि मथुराधीश के देश व विदेश में भक्त हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में नहीं आ पाते।
ये हैं ९ निधियां
नाथद्वारा में श्रीनाथ जी नवनीतलाल भगवान प्रधान पीठ है। इसके बाद कोटा मेे श्रीमथुराधीश भगवान नाथद्वारा में श्री विठ्ठलनाथ भगवान नाथद्वारा में मौजूद हैं। इसके अलावा तृतीय पीठ कांकरोली में द्वारकाधीश भगवान, चतर्थ पीठ श्री गोकुलनाथ भगवान, पंचम पीठ श्री गोकुलचन्द भगवानए सप्तम पीठगोकुल में श्री मदनमोहन भगवान की है।
डेढ़ सौ साल पहले हुआ था पहला छप्पन भोग
मिलन गोस्वामी बावा ने कहा कि कोटा में इस स्थान पर पहली बार 150 वर्ष पूर्व छप्पन भोग के कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। पुष्टिमार्ग में ठाकुर जी की भाव प्रतिष्ठा मानी गई हैए प्राण प्रतिष्ठा नहीं। पुष्टिमार्ग में ठाकुरजी एक स्थान से दूसरे स्थान पर विचरण करते हैं। इसी कारण से औरंगजेब के कालखण्ड में वल्लभ सम्प्रदाय बच सका था। छप्पनभोग स्थान भी ठाकुर जी का है इसलिए भगवान मथुराधीश प्रभु श्री प्रथमेश नगर छप्पनभोग पर विराजमान हुए हैं। अब वर्ष में कम से कम एक बार ठाकुरजी को छप्पन भोग स्थल पर लाया जाएगा।