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BIG NEWS: रणथम्भौर का टाइगर टी-98 कोटा में लापता

रणथम्भौर से भटककर सुल्तानपुर वन क्षेत्र में पहुंचे बाघ टी-98 का 7 दिन से कोई सुराग नहीं लग पा रहा है।
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कोटा

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Zuber Khan

Feb 07, 2019

Tiger-110

Presence of predators in Sanjay Tiger Reserve

सुल्तानपुर. कोटा. क्षेत्र में रणथम्भौर से भटककर सुल्तानपुर वन क्षेत्र में पहुंचे बाघ टी-98 का 7 दिन से कोई सुराग नहीं लग पा रहा है। वनकर्मी वन क्षेत्र में ट्रेकिंग के नाम पर पदचिन्हों की तलाश कर रहे हैं लेकिन बाघ का न तो कहीं कोई निशान मिल रहा न ही कोई शिकार। ऐसे में वन्यजीव प्रेमियों में मायूसी है। इस बीच बाघ क ी कोई लोकेशन पता नहीं चलने पर सहायक वन संरक्षक तरुण मेहरा ने टाइगर प्रोजेक्ट विभाग को पत्र लिखकर टाइगर ट्रेकिंग में एक्सपर्ट लोगों को भेजकर मदद करने का आग्रह किया है। वन विभाग की 4-4 सदस्यों की कुल 4 टीमें प्रतिदिन जंगलों में बाघ के पगमार्क तलाश रहे हैं।

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हो सकता है लौट गया
एसीएफ मेहरा ने बताया कि सुल्तानपुर क्षेत्र में चम्बल नदी किनारे को छोड़ कुल 423 हैक्टेयर क्षेत्र में जंगल फैला हुआ है। नियमित ट्रेकिंग की जा रही है। सात दिन से बाघ टी-98 के न तो कोई पगमार्क मिले न ही कोई शिकार किया हुआ मिला। संभव है बाघ जिस रास्ते से आया उसी रास्ते रणथम्भौर लौट गया है।

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गौरतलब है कि रणथम्भौर से निकलकर बाघ पहले बूंदी के जंगलों में रहा। फिर कुछ दिन बिताने के बाद उसने कोटा जिले की सीमा में कदम रखा और बूढ़ादीत के उजाड़ क्षेत्र में मेहराना के जंगल में अपना ठिकाना बनाया। कई दिनों तक यहां रहा और नील गाय का शिकार करने के बाद फिर वह आगे बढ़ा और सुल्तानपुर क्षेत्र के जंगल में चला गया।
इससे पूर्व बाघ की उजाड़ क्ष्ेात्र में मौजूदगी से यहां के खेड़ली तंवरान, निमली, मण्डावरा, महराना गांवों में सन्नाटा पसरा गया। इन गांवों में करीब 7 हजार परिवारों की आबादी है। यहां दोपहर को दिनभर ग्रामीणों की चहल-पहल बनी रहती थी लेकिन जब से इस क्षेत्र में टागइर ने कदम रखा तब से ही इन गांवों में दिन भी रात जैसा खामोश हो गया।