
कार्यक्रम को संबोधित करते पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी
Stree Deh Se Aage: शिक्षानगरी कोटा में सोमवार को हाड़ौती की महिलाओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक आधार पर 'स्त्री' का मर्म और दर्शन समझा। पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने मातृशक्ति को उनकी शक्ति, सत्य और सामर्थ्य का अहसास करवाया। उन्होंने भारतीय दर्शन के जरिए बताया कि स्त्री शक्ति है, प्रकृति है, सृजन है और करुणा का सागर भी है। वह केवल जन्म नहीं देती, संस्कार भी देती है। स्त्री केवल देह नहीं, दृष्टि, विवेक और संस्कार है।
पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित हो रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में सोमवार सुबह जवाहर नगर स्थित एलन सत्यार्थ-1 कैंपस ऑडिटोरियम में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पुस्तक 'स्त्री देह से आगे' पर विषय विवेचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहर के साथ कोटा जिले, बारां, झालावाड़ जिले तथा रावतभाटा क्षेत्र के दूरदराज के गांव-कस्बों से भी सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पहुंची। नारी शक्ति ने बड़ी तन्मयता से कोठारी के संबोधन को सुना और अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त की, जिनका कोठारी ने जवाब दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान संपादक कोठारी, कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा और लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने दीप प्रज्वलन कर किया।
इससे पहले स्वागत संबोधन में एलन के निदेशक गोविंद माहेश्वरी ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का योगदान समाज और राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि 'स्त्रीः देह से आगे' जैसे विषय पर रखा गया चिंतन केवल स्त्री विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, वैदिक विज्ञान, परिवार, समाज और राष्ट्र के संदर्भ में व्यापक चिंतन है। कोठारी की प्रभावशाली लेखनी के माध्यम से ये विचार पुस्तकों के रूप में सामने आए हैं, जो समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए वैचारिक धरोहर सिद्ध होंगे। एलन के निदेशक नवीन माहेश्वरी एवं गोविंद माहेश्वरी ने कोठारी को मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया।
उन्होंने मातृशक्ति से आह्वान किया कि धन, संपत्ति माया के रूप हैं। यह कई बार अनजाने में अंधकार की ओर ले जाती है। हम चेतना के साथ जीएं। इच्छा कर्म नहीं है। जहां कर्म नहीं, हम खुद को प्राप्त नहीं कर सकते। उन्होंने आत्मा व शरीर में भी अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि शरीर समय के साथ बदलता जाएगा, आत्मा सूक्ष्म है, जो शरीर का हिस्सा नहीं है। आत्मा का शोधन करने की जरूरत है। हम पुराने शास्त्रों को पढ़ें और आधुनिक किताबों को पढ़ें तो एक बहुत बड़ा अंतराल दिखता है।
कार्यक्रम की शुरुआत में कोठारी को राउमावि आवासन मंडल केशवपुरा की गाइड इकाई ने गार्ड ऑफ ऑनर और बुलबुल इकाई ने बड़ी सलामी देकर सम्मान व्यक्त किया। स्काउट-गाइड संगठन के जिला प्रधान प्रकाश जायसवाल, उपप्रधान यज्ञदत्त हाड़ा ने कोठारी का स्कार्फ पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।
महिलाओं में अपार उत्साह देखने को मिला। हाड़ौतीभर से युवतियां व महिलाएं कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पहुंचने लगी। ऑडिटोरियम खचाखच भर गया। परिसर स्थित दूसरे हॉल में महिलाओं के बैठने की अतिरिक्त व्यवस्था की गई। यहां एलईडी पर लाइव प्रसारण देखा।
विज्ञान नगर निवासी कलाकार वेदभूषण आर्य ने करीब तीन माह की मेहनत से जयपुर स्थित पत्रिका गेट का मॉडल तैयार किया। उन्होंने मॉडल में लाइटें भी लगाई। उन्होंने ये मॉडल पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी को भेंट किया। इस दौरान कोठारी ने उनके मॉडल की तारीफ की। महिलाओं ने पत्रिका गेट के मॉडल के साथ फोटो भी खिंचवाए।
कार्यक्रम के समापन पर शहर के विभिन्न महिला संगठनों के अलावा सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक व शैक्षणिक संस्थानों ने कोठारी का स्वागत और अभिनंदन किया गया। महिला संगठनों में स्वागत की होड़ रही। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की संभाग प्रभारी उर्मिला की अगुवाई में प्रतीक चिह्न भेंटकर स्वागत किया। ब्राह्मण समाज की ओर से विधायक संदीप शर्मा की पत्नी गीता शर्मा की अगुवाई में फरसा भेंटकर अभिनंदन किया। इस दौरान समाजसेवी संतोष शर्मा, शीला तिवारी वंदना वशिष्ठ साथ रहीं। पूर्व उपमहापौर सुनीता व्यास, नगर निगम उपायुक्त भावनासिंह, उपायुक्त दयावती सैनी, हेमलता गांधी ने भी स्वागत किया। डॉ. सुषमा आहूजा, भाविप की प्रांतीय महिला प्रमुख उमा पालीवाल, कोटा जिला सह प्रभारी रचना पाठक, प्रांतीय उपाध्यक्ष कुसुम शर्मा, माहेश्वरी महिला मंडल की ओर से अध्यक्ष प्रीति राठी, नीना मरचुनिया, रजनी मोदी, महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष शालिनी गौतम, खण्डेलवाल महिला जागृति मंच की ओर से अध्यक्ष शिखा खंडेलवाल, सचिव सोनू खंडेलवाल, विप्र फाउंडेशन की महिला प्रदेश अध्यक्ष शशि शर्मा, सुनीता शर्मा, मंजू तिवारी, विजयवर्गीय महिला मंडल की संयोजिका दर्शना गांधी, संगीता विजय, ज्योति विजय, दाधीच समाज महिला मंडल अध्यक्ष स्मिता शर्मा, स्मृति दाधीच, आशा दाधीच, मंत्री अंबिका शर्मा, पूज्य सिंधी हाड़ौती पंचायत की अध्यक्ष दिव्या शर्मा, सिंधी समाज की सावित्री गुप्ता, हाड़ौती महिला राजपूत महासभा की ओर से नीना छापोल, हेमलता चौहान, निधि चंद्रावत, संजना राठौड़, ब्रजेश नरुका, नेहा हाड़ा, सुनीता हाड़ा, वर्षा शक्तावत, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की प्रदेशाध्यक्ष तरुणा सोलंकी, सनाढ्य ब्राह्मण महासभा की प्रदेश महामंत्री कृष्णा शर्मा, दिगम्बर जैन महासमिति कोटा संभाग की अध्यक्ष मधु शाह, केट वुमन विंग की नीलम विजय, रोटरी क्लब की डॉ. सुषमा आहूजा ने अभिनंदन किया।
मैं पुरुष और स्त्री को दो अलग-अलग बांटने की सोच का पक्षधर नहीं हूं। आज हम घरों के भीतर भी सार्वजनिक भूमिका गढ़ने लगे हैं, जिससे पारिवारिक संतुलन बिगड़ रहा है। ईश्वर ने जो स्वाभाविक भूमिकाएं दी हैं, हम उन्हें भ्रमित कर रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि स्त्री और पुरुष में एकरूपता हो, प्रतिस्पर्धा नहीं। दोनों एक-दूसरे के पूरक बनकर आगे बढ़ें। जहां तक सुरक्षा की बात है, संस्कार ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। मां की भूमिका सदैव देने, सहेजने और संरक्षण की रही है। जब परिवार मजबूत होगा, संवाद बढ़ेगा और मूल्य आधारित शिक्षा दी जाएगी, तो शारीरिक और साइबर दोनों प्रकार की सुरक्षा स्वतः सुदृढ़ होगी।
तेजस्विनी गौतम, सिटी एसपी, कोटा
एक ही मां से जन्म लेने के बावजूद संतानों के स्वभाव में अंतर का मुख्य कारण उनका प्रारब्ध होता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने पूर्व संस्कारों और कर्मों के साथ इस जीवन में प्रवेश करता है। मां केवल शरीर को जन्म देती है, जबकि आत्मा अपने साथ पूर्व जन्मों के अनुभव, प्रवृत्तियां और संस्कार लेकर आती है। इसी कारण समान वातावरण, पालन-पोषण और शिक्षा के बावजूद बच्चों की सोच, व्यवहार और रुचियों में अंतर दिखाई देता है। माता-पिता का दायित्व है कि वे प्रत्येक संतान की प्रकृति को समझें, उसे स्वीकार करें और उसके अनुरूप मार्गदर्शन दें, ताकि हर बच्चा अपनी क्षमता के अनुसार विकसित हो सके।
प्रमिला श्रृंगी
जीवन के हर चरण में स्त्री की भूमिका बदलती रहती है। वह बेटी होती है, बहन होती है और आगे चलकर मां भी बनती है। इसमें किसी अतिरिक्त चिंतन या संशय की आवश्यकता नहीं है। स्त्री का सबसे बड़ा योगदान यह है कि वह अच्छे संस्कारों वाले पुरुषों और जिम्मेदार नागरिकों को तैयार करती है। यही समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है।
रचना गोयल, समाजसेविका
भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन, कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल जोशी, डॉ. प्राची दीक्षित, कुलदीप माथुर, एजी मिर्जा, हरगोविंद निर्भीक, मजिद मलिक कमांडो ने भगवान बुद्ध की प्रतीकात्मक प्रतिमा भेंट की। अखिल भारत वर्षीय दिगम्बर जैन बघेरवाल संघ राष्ट्रीय मुख्य संयोजक विमलचंद जैन, मोनिका कोटिया व इन्द्रा सेठिया ने स्वागत किया। अखिल भारतीय वैश्य महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश विजय, वैश्य समाज के जिलाध्यक्ष दिनेश विजय, महामंत्री भुवनेश गुप्ता, कोटा सेन्ट्रल गुरुसिंह सभा के अध्यक्ष तरुमीत सिंह बेदी, सचिव हरमीत सिंह, अवतार सिंह, गायत्री परिवार की ओर से ट्रस्टी जीडी पटेल, डॉ. विनीता शर्मा, पुष्पांजलि विजय, मधु स्मृति संस्थान के हरगोबिंद निर्भीक और चम्बल हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश पांडे ने अभिनंदन किया।
Updated on:
24 Dec 2025 11:44 am
Published on:
22 Dec 2025 08:36 am
