5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कोटा
तीन साल में कितने किए घोटाले अब खुलेगी कारनामों की फ़ेहरिस्त…
Play video

तीन साल में कितने किए घोटाले अब खुलेगी कारनामों की फ़ेहरिस्त…

घोटाले में फंसे यूआईटी पूर्व चेयरमैन मेहता कोर्ट में पेश.. 20 तक रिमांड पर भेजा
Google source verification

कोटा

image

Suraksha Rajora

Feb 16, 2019

कोटा /बूंदी. कोटा नगर विकास न्यास के अधिकार क्षेत्र में अधिग्रहण की गई जमीन के बदले अवार्ड राशि जारी कराने में गडबडी के आरोप में एसीबी की गिरफ्त में आए यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष आरके मेहता को शनिवार को एसीबी न्यायालय में पेश किया जहां एसीबी ने न्यायाल से पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की ऐसे में मेहता 20 तक रिमांड पर भेजा ।

 

 

आप को बता दे कि बूंदी एसीबी टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व चेयरमैन रामकुमार मेहता को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें सुबह मोर्निंग वॉक के दौरान तलवंडी स्थित घर के बाहर से हिरासत में लिया गया था। टीम उन्हें बूंदी लेकर आई और पूछताछ की। पूछताछ में मेहता के जमीन के रिकॉर्ड को लेकर 5 लाख रुपए लेने का जुर्म प्रमाणित पाए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

 

यह था मामला


एसीबी के उपअधीक्षक तरुणकांत सोमाणी ने बताया कि कोटा नांता स्थित खातेदार खेमचंद माली व अन्य की 3.33 हैक्टेयर भूमि को नगर विकास न्यास कोटा ने मोहनलाल सुखाडिय़ा आवास योजना के लिए दो चरणों में अवाप्त किया था। यह भूमि महेश कुमार मेघानी व अन्य द्वारा मूल खातेदारों से विक्रय पत्र के जरिए राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा ली और मुआवजे में विकसित भूमि लेने के लिए न्यास में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिसे तत्कालीन अध्यक्ष मेहता ने न्यास की बैठक में प्रस्ताव बनवाकर जयपुर मुख्यालय भिजवा दिया। मेहता ने महेश कुमार मेघानी को अपने परिचित दलाल कंवलजीत सिंह से मिलवाया था।

 

 

कंवलजीत के सचिवालय में उच्च अधिकारियों से अच्छे संबंध थे। नान्ता स्थित जमीन का कोटा स्तर से ही निर्णय लिए जाने के आदेश करवाने की एवज में कंवलजीत सिंह ने मेघानी से 20 लाख रुपए में सौदा तय किया। सौदे के मुताबिक, 5 लाख रुपए महेश मेघानी से कमलजीत सिंह को दिलवाए गए। उसके बाद 10 लाख रुपए रामकुमार मेहता व कंवलजीत सिंह के कहे अनुसार कंवलजीत सिंह के खातों में जमा करवाए। शेष 5 लाख पूर्व चेयरमैन मेहता के घर पर मेघानी देकर आया।


राजनीतिक सम्पर्क


भाजपा नेता मेहता के पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी करीबी हैं। मेहता की गिरफ्तारी को लेकर बीते छह माह से अटकलें थीं। सरकार बदलते ही मेहता की गिरफ्तारी हो गई।
डीजी ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश पुलिस महानिदेशक (एसीबी) आलोक त्रिपाठी ने कोटा पुलिस अधीक्षक एसीबी सुधीर चौधरी को स्वयं के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिसकी पालना में एसीबी बूंदी के उपअधीक्षक सोमानी की टीम सुबह की कोटा पहुंच गई और मेहता को आवास के बाहर से हिरासत में ले लिया। टीम ने एक बार पहले भी प्रयास किया था।

 


यह था पेच, जिसकी ली राशि


अवाप्त की गई जमीन की ऐवज में मुआवजा राशि जारी हुई थी। यह राशि नियमानुसार मूल खातेदार के नाम से जारी हुई। जो प्रथम चरण में 40 लाख 59 हजार 412 और द्वितीय चरण में 3 करोड़ 63 लाख 50 हजार 403 रुपए थी। उक्त जमीन महेश कुमार मेघानी व अन्य द्वारा मूल खातेदारों के जरिए विक्रय पत्र के राजस्व रिकॉर्ड में अपने नाम दर्ज करा ली थी, लेकिन नगरीय विकास विभाग की ओर से 22 दिसम्बर 2014 को जारी परिपत्र के बिन्दु संख्या 1 के अनुसार विकसित भूमि केवल उसी खातेदार को आवंटित की जानी थी, जिसकी भूमि अवाप्त की गई।

 

बावजूद इसके महेश कुमार ने मुआवजे के बदले में विकसित भूमि लेने के लिए यूआईटी में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर दिया। जिसे मेहता और अन्य लोगों ने सांठगांठ कर विभाग के माध्यम से जयपुर भिजवा दिया। तत्कालीन चेयरमैन मेहता की मिलीभगत से प्रार्थना पत्र को यूआईटी की पत्रावली पर ले लिया। उसका न्यास की बैठक में प्रस्ताव लेकर अनुमोदन भी कर दिया।


आयकर विभाग की नजर अब मेहता पर


पद के दुरुपयोग के मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व न्यास अध्यक्ष रामकुमार मेहता पर आयकर विभाग ने भी नजरें गढ़ा दी हैं। इस मामले में आयकर विभाग आय से अधिक सम्पत्ति एकत्र करने, विभाग को जानकारी नहीं देने व टैक्स चोरी जैसे मामले मेहता की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। मेहता की गिरफ्तारी के शहर में चर्चे रहे। उनके आसपास रहने वाले कई नेता व लोग गायब नजर आए। राजनीतिक दलों व जनप्रतिनिधियों में भी इस मामले की चर्चा रही। यूआईटी परिसर में भी लोग मेहता के बारे में बातचीत करते नजर आए। यूआईटी के अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।

 

प्रारंभिक पूछताछ में मेहता बोले


मैंने कंवलजीत को दे दिए थे रुपएकोटा ञ्च पत्रिका. यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद एसीबी की बूंदी टीम ने शुक्रवार शाम को आरोपी से प्रारंभिक पूछताछ शुरू की।इस दौरान एसीबी ने नांता भूमि के मामले को जयपुर मुख्यालय से यूआईटी कोटा भिजवाने के लिए 20 लाख रुपए में सौदा तय करने व 5 लाख रुपए के बारे में पूछताछ की। जिसके जवाब में यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष रामकुमार मेहता ने पांच लाख रुपए कंवलजीत सिंह को देने की बात कही। उसने कहा कि इस मामले में मैंने कोई रुपए नहीं लिए। इसके अलावा भी एसीबी ने मामले से जुड़े तीन दर्जन से अधिक सवाल पूछे।

 

 

एसीबी सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने में मेहता आनाकानी करते नजर आए। एसीबी जांच में फिलहाल सहयोग नहीं कर रहे। जांच अधिकारी तरुणकांत सोमानी ने बताया कि मेहता को शनिवार को कोटा के एसीबी न्यायालय में पेश किया जाएगा। सोमानी ने बताया कि इस मामले में एसीबी ने पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया है। इसके चलते पूर्व न्यास अध्यक्ष के आवास की तलाशी नहीं ली गई। लेन-देन का मामला पुराना है। मामले में पांच लाख रुपए राशि बरामदगी के प्रयास किए जाएंगे।