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Valentine Day Special: वैज्ञानिकों का दावा: दिल नहीं दिमाग करता है दिलबर से प्यार, कैसे, पढि़ए खास रिपोर्ट

अक्सर लोगों को कहते सुना होगा। नजरें चार हुई, दिल धड़का और प्यार हो गया। कुछ कहते हैं, प्यार भावनाओं का [इमोशनल] मामला है।
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कोटा

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Zuber Khan

Feb 14, 2019

Valentine Day Special

Valentine Day Special: वैज्ञानिकों का दावा: दिल नहीं दिमाग करता है दिलबर से प्यार, कैसे, पढि़ए खास रिपोर्ट

कोटा. अक्सर लोगों को कहते सुना होगा। नजरें चार हुई, दिल धड़का और प्यार हो गया। कुछ कहते हैं, प्यार भावनाओं का [इमोशनल] मामला है। यह सब बातें सदियों से पीढ़ी-दर-पीढी कही जाती रही हैं, लेकिन ज्यादा रोमांटिक होने की जरूरत नहीं है। जरा विज्ञानियों की सुन लीजिए...। आज वैलेंटाइन डे है और वे प्यार के बारे में कुछ और ही कह रहे हैं। दिल तो बेचारा प्यार में नाहक बदनाम होता रहा। वैज्ञानिकों शोधों से यह दावा किया गया कि दिलबर को देखकर कुछ-कुछ दिल में नहीं दिमाग में होता है। हमारे हार्मोन ही इन बदलावों को करते हैं। दिमाग ही इन्हें नियंत्रित करता है। प्यार को भी दिमाग से निकलने वाले कुछ हार्मोन का आसरा होता है।

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दिल नहीं दिमाग में मचती है खलबली : हार्मोन का खेल
कोटा मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. मनोज सालूजा का कहना है कि शरीर के अंदर होने वाले बदलावों के मुताबिक प्यार के तीन चरण होते हैं। प्यार के पहले चरण में दिलबर के दीदार और नजदीकी पाने की तीव्र चाहत दिल की मजबूरी नहीं होती। ये टेस्टोस्टेरॉन और ऑस्ट्रोजेन हार्मोन की करतूत होती है।

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इस चरण में शरीर में इन दोनों हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसके बाद आता है प्यार का वास्तविक चरण। इसमें दिन का चैन गायब हो जाता है, रातों की नींद उड़ जाती है। भूख-प्यास मर जाती है। शरीर की इस हालत के जिम्मेदार डोपामाइन, नोरपीनेफ्राइन और सीरोटोनिन हार्मोन होते हैं। सुना है प्यार के इस चरण में दिल कुछ ज्यादा ही धड़कने लगता है, लेकिन इसके पीछे नोरपीनेफ्राइन हार्मोन होता है। तीसरा चरण है लगाव। इसी चरण में प्यार के रिश्ते की डोर मजबूत होती है।

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एक बार फिर रिश्तों की डोर मजबूत बनाने की जिम्मेदारी हार्मोन ही निभाते हैं। तंत्रिका तंत्र से निकलने वाले हार्मोन ऑक्सीटोसिन और वासोप्रेसीन रिश्तों पर मजबूत जोड़ लगाते हैं। इश्क के हार्मोन ऑक्सीटोसिन की शरीर में अहम भूमिका होती है। गर्भवती महिलाओं में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्तर ज्यादा होता है। वैसे तो रिश्तों की डोर मजबूत बनाने वाले दूसरे हार्मोन वासोप्रेसीन का मुख्य काम तो किडनी को नियंत्रित करना होता है, लेकिन जब इश्क का मामला होता है तो इसकी भूमिका बदल जाती है।


भावनाओं से नहीं, मोटिवेशन से होता है प्यार
अमरीका के रगर्स विवि की मानव शास्त्री और प्रेम के साइंस कनेक्शन का सिद्धांत देने वाली हेलेन फिशर ने ये दावा किया। हेलेन ने बाकायदा प्रेम के शुरुआती चरण में डूब रहे लोगों पर अध्ययन किया। उन्होंने अध्ययन में शामिल लोगों की एमआरआई की। इस बीच उन्हें उनके 'अपनेÓ की तस्वीर दिखाई गई और उस पर उनकी दिमागी हलचल देखी गई। इस प्रयोग में दिमाग के उस हिस्से में हलचल दिखी जो मोटीवेशन और रिवॉर्ड से जुड़ी होती है। इससे यह माना गया इश्क के लिए दिमाग मोटीवेट करता है। प्यार के शुरुआती चरण में इमोशन से जुड़े दिमाग के हिस्से में कोई हलचल नहीं देखी गई। प्यार में पूरी तरह से डूब चुके दूसरे और तीसरे चरण में ही इस हिस्से में हलचल दिखी।