
कोटा. जिला कलक्टर और सीईओ के साथ हुई अभद्रता के विरोध में तमाम विभागों के अधिकारियों ने भी मोर्चा खोल दिया है। बैठक में अधिकारियों के साथ हुए अमर्यादित व्यवहार पर अधिकारियों ने मुख्य सचिव एवं विभाग अध्यक्षों को सामूहिक पत्र लिखकर कहा है कि जब तक शासन बैठकों को तय एजेंडे के मुताबिक चलाने और उसमें शामिल होने वाले अधिकारियों की सुरक्षा का आश्वासन नहीं देता तब तक सभी लोग ऐसी बैठकों का बहिष्कार करेंगे।
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स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद भी रमेश महावर ने बैठक में मौजूद अधिकारियों के पास जाकर उन्हें धमकाने की कोशिस की। जिसके विरोध में बैठक की अध्यक्षता कर रहे जिला प्रमुख के समक्ष विरोध दर्ज कराने के बाद सभी बैठक कक्ष से बाहर आ गए। इससे पहले भी कई बैठकों में अधिकारियों के साथ अभद्रता करने की जानकारी दी जा चुकी है। इसलिए शासन को इसे गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।
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हंगामे के बाद जिला प्रमुख ने पत्रकार वार्ता बुलाकर सीईओ पर आरोप लगाया कि परिषद सदस्य क्षेत्र के विकास के लिए प्रस्ताव भेज रहे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई करना तो दूर प्रस्तावों को स्वीकार तक नहीं किया जा रहा। जबकि जिला परिषद में ढ़ाई करोड़ रुपए का बजट पड़ा है। इसके उलट सीईओ खुद सदन में जानकारी देती हैं कि वह सांसद निधि के कामों में व्यस्त थीं।
प्रमुख ने रमेश महावर का बचाव करते हुए कहा कि हाड़ौती की आम बोलचाल की भाषा का ही उन्होंने इस्तेमाल किया था, जिस पर अफसर भड़क गए। गलती का ऐहसास होने के बाद उन्होंने माफी भी मांग ली। मैं उनको कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए सदन से निकालने की भी कह चुका था, लेकिन अफसरों के पास नए प्रस्तावों की बात तो छोडि़ए पुरानी बैठक में पारित प्रस्तावों की अनुपालना रिपोर्ट तक नहीं थी। इसलिए फजीहत से बचने के लिए उन्होंने बहिष्कार का रास्ता चुना।
महावर ने सीईओ पर तानाशाही रवैया अपनाने और जनहित के काम न करने का आरोप लगाया, लेकिन जब पत्रिका संवाददाता ने उनसे पूछा कि सीईओ की तैनाती के बाद उन्होंने सीईओ को कितने कामों के प्रस्ताव या काम न होने की शिकायतें सौंपी हैं? जिसके जवाब में उन्होंने किसी भी तरह के लिखित या मौखिक प्रस्ताव न रखने की बात कही। कलक्टर के विरोध की वजह पूछने पर महावर ने कहा कि बैठक शुरू होने के बाद से ही विधायक पूरी तरह काबिज हो गए थे। परिषद के सदस्यों को तो बोलने का मौका ही नहीं मिल रहा था। मैने इसी का विरोध किया था। कलक्टर के लिए तो सिर्फ इतना ही बोला कि कोई जरूरी काम आ जाएगा तो यह भाग जाएंगे और इसके बाद फिर हमारी कोई सुनवाई नहीं करेगा।