
Womens Day special : बिखरते परिवारों को संजोने में जुटी कुसुमलता
छोटी-छोटी बातों को लेकर पति-पत्नी में होने वाली अनबन जब बड़ा रूप ले लेती है तो मामला पहुंचता है महिला थाने। हर दिन थाने में पहुंचने वाले 8 से 10 मामलों को समझाइश कर बिखरते परिवारों का संजोने में जुटी हैं महिला थाने की थानाधिकारी कुसुमलता मीणा। इसके अलावा महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता से लेकर कार्रवाई तक करने में इस लेडी सिंघम ने अपनी कार्यशैली से अलग ही पहचान बनाई है।
समझाइश से बचते हैं सैकड़ों परिवार
उन्होंने बताया कि पति-पत्नी में झगड़ा होने के बाद अक्सर दम्पती व परिजन थाने पहुंच जाते हैं। ऐसे में उनकी समझाइश कर उन्हें सोचने-समझने के लिए वक्त दिया जाता है। महिलाओं को ससुराल के स्थान पर पीहर भेजा जाता है। गुस्से में हुए झगड़े के अधिकांश मामले इससे सुलझ जाते हैं। महिला थाने में पति-पत्नी के विवाद के मामले सबसे अधिक पहुंचते हैं।
मन को कमजोर बना लिया तो जीती हुई बाजी भी इंसान हार जाता है, आत्मविश्वास है तो जीत पक्की है, यह कहना है धावक अर्चना मूंदड़ा का। अर्चना मूंदड़ा ने बताया कि वेट लूज करने के लिए उन्होंने जिम जॉइन किया। ट्रेनर अमित चतुर्वेदी ने प्रेरित किया तो मैराथन दौड़ में हिस्सा लेने लगी। शुरू में थोड़ा असहज महसूस किया, लेकिन जैसे-जैसे हिस्सा लेती रही अच्छा लगने लगा। अर्चना 40 किमी की 4, 21 किमी की 14 तथा लेह में 11500 फीट की ऊंचाई पर होने वाली मैराथन में भी भाग ले चुकी हैं।
Published on:
08 Mar 2019 05:24 pm
