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राजस्थान: महिलाओं ने तहसीलदार की गाड़ी घेरी, टायर की हवा निकाली, जानिए क्यों

Rajasthan News: महिलाओं ने तहसीलदार को मौके पर घेर लिया और उनके वाहन की हवा तक निकाल दी। जानिए क्या है मामला

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Photo- Patrika

Rajasthan News: नावां शहर। उपखण्ड मुख्यालय के बीहड़ इलाके में खेजड़ी सहित अन्य पेड़ों को बचाने की मांग को लेकर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया।

इस दौरान महिलाओं ने तहसीलदार को मौके पर घेर लिया और उनके वाहन की हवा तक निकाल दी। बढ़ते तनाव को देखते हुए एसडीएम दिव्या सोनी के आग्रह पर तत्काल बैठक आयोजित की गई।

स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि प्रस्तावित 450 करोड़ के सोलर प्लांट के कारण बीहड़ क्षेत्र की खेजड़ी और वनस्पति को भारी नुकसान हो रहा है।

कुमावत समाज के अध्यक्ष सीताराम नागा, जालेश्वर महादेव मंदिर से राजेन्द्र नोखवाल और अन्य स्थानीय नेताओं ने बताया कि यह क्षेत्र वर्षों से गौवंश और पक्षियों का आश्रय स्थल रहा है।

इसके अलावा, यह मार्ग किसानों के खेतों और मंदिर तक पहुंचने के लिए उपयोग होता है। इन रास्तों को निजी कंपनी द्वारा बंद करने की कोशिश की जा रही है, जिसे क्षेत्रवासी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

कंपनी काट रही खेजड़ी, लोगों ने लगाया गले, धरने पर बैठे

बीहड़ क्षेत्र से सैकड़ों खेजड़ी पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया है। मंगलवार को जब लोग बीहड़ क्षेत्र पहुंचे तो उन्होंने पेड़ों को बचाने के लिए गले लगा लिया और मुख्य मार्ग पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

एडवोकेट राजेश कुमावत ने आरोप लगाया कि खेजड़ी पेड़ों को खुलेआम काटा जा रहा है, लेकिन कोई इस पर रोक नहीं लगा रहा है। प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इस दौरान पटवारी और होमगार्ड के साथ स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई, लेकिन पुलिस और प्रशासन की उपस्थिति से मामला शांत हुआ।

प्रशासन-सोलर प्लांट अधिकारियों और क्षेत्रवासियों की वार्ता विफल

एसडीएम दिव्या सोनी ने बढ़ते विरोध को देखते हुए एडीएम राकेश गुप्ता से बातचीत की और मामले को सुलझाने का प्रयास किया। इसके बाद प्रशासन की मौजूदगी में सोलर प्लांट के अधिकारियों और शहरवासियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।

बैठक में क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट रूप से अपनी मांगें रखीं कि गौवंश के लिए सुरक्षित स्थान, मंदिर और किसानों के खेतों तक पहुंचने के लिए मार्ग, तथा गोचर भूमि की अवरोध रहित उपलब्धता चाहिए।

लोगों ने कहा कि बीहड़ क्षेत्र में यह पारंपरिक मार्ग और चरागाह क्षेत्र है, जिसे किसी भी हालत में बंद नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, काफी चर्चा के बावजूद किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई, और वार्ता विफल हो गई।

क्षेत्रवासी बैठक से बाहर आ गए और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और उग्र होगा। विरोध प्रदर्शन के दौरान कानाराम सिहोटा, मंजू देवी, गीता देवी, रोहित कुमावत, बजरंग राजोरा, गिरिराज नोखवाल, टोनी नोखवाल, भीवाराम नागा, सीताराम नागा, राजेश सिहोटा सहित अन्य लोग शामिल थे।

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